केजरी के इस्तीफे से टेंशन फ्री हुई भाजपा?
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अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद अब बदली परिस्थितियों में भाजपा अपने लिए ज्यादा सियासी नुकसान नहीं मान रही है।
पार्टी का मानना है कि अपने 49 दिन के कार्यकाल में केजरीवाल ने अपरिपक्वता का ही परिचय दिया। इसलिए भाजपा आश्वस्त दिखने लगी है कि केजरीवाल अब उसके प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की राह में कांटा नहीं बन सकेंगे।
इसके लिए भाजपा हाल के उस सर्वे का उल्लेख कर रही है जिसमें पार्टी को 200 से ज्यादा सीटें मिलती दिखाई गई हैं, वहीं केजरीवाल को मात्र सात सीटों तक सीमित दिखाया गया है।
केजरीवाल को दिया ‘रणछोड़दास खांसड़’ नाम
दिल्ली में भाजपा विधायक दल के नेता हर्षवर्धन कहते हैं कि मोदी देश में सुशासन व विकास का प्रतीक बन चुके हैं, जबकि केजरीवाल जिम्मेदारी से भाग गए। इसलिए भाजपा ने केजरीवाल का उपहास उड़ाने के लिए उन्हें ‘रणछोड़दास खांसड़’ नाम भी दे दिया है।
केजरीवाल के बयानों और उसके उलट किए फैसलों को भी जनता दरबार तक पहुंचाने की तैयारी है। केजरीवाल के एनजीओ को अमेरिका से मिले धन के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी पर सियासी हमले तेज होंगे।
भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी कहते हैं कि केजरीवाल अब ‘शरीफ आदमी’ बनकर देशभर में घूमने की कोशिश करेंगे लेकिन उनके पास उपलब्धियों के नाम पर कुछ भी नहीं है।
आप में भगदड़ मचना तय मान रही भाजपा
बहरहाल, भाजपा का मानना है कि दिल्ली में भले ही केजरीवाल 28 सीटें पा गए हों, लेकिन लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए बेहतर संगठन की भी जरूरत होती है।
यह जरूर है कि मुख्यमंत्री बने रहने पर केजरीवाल दिल्ली में उलझे रहते, लेकिन मुख्यमंत्री रहते हुए यदि देशभर का दौरा करते तो रुतवा ही कुछ और होता। उन्हें खुद को सादगी का प्रतीक बताने में आसानी से कामयाबी मिलती। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा।
भाजपा का यह भी मानना है कि दिल्ली में लंबे समय तक राष्ट्रपति शासन लगे रहने से विधायकों में निराशा बढ़ेगी। एक भी विधायक नहीं चाहता कि दोबारा चुनाव में जाएं। इसलिए देर-सबेर विधानसभा भंग करने की चर्चा शुरू होने पर आप में भगदड़ मचना तय है। ऐसे में भाजपा केजरीवाल की विदाई में ज्यादा नुकसान नहीं देख रही है।