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तैयार हो रही है भाजपा-शिअद के बीच टकराव की जमीन

Thu, 11 Feb 2016 05:46 AM IST
Updated Thu, 11 Feb 2016 05:46 AM IST
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BJP and SAD gears up for sea battle in Punjab

अप्रैल महीने में पंजाब की राज्यसभा की एक सीट पर होने वाले चुनाव के बाद शिरोमणी अकाली दल (शिअद) और भाजपा के बीच तलवारें खिंचने की जमीन तैयार होने लगी हैं।

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दअरसल राज्य के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार हाल में तीन दर्जन सीटें हासिल करने का मन बनाया है, जबकि शिअद ने भी से साफ कर दिया है कि वह भाजपा को पुराने समझौते के तहत 23 सीटें ही देगी। भाजपा फिलहाल अपने पत्ते खोलने से पहले शिअद से राज्यसभा की सीट के लिए सहयोग हासिल करना चाहती है।
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दोनों दलों के बीच राज्यसभा की सीट को लेकर भी पेंच फंसने के आसार हैं। अगर पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्घू ने राज्यसभा आने पर हामी भरी तो शिअद उनके नाम पर आसानी से सहयोग करने के लिए राजी नहीं होगा।
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गौरतलब है कि अध्यक्ष पद के लिए शिअद से नाता तोड़ने का शर्त रखने वाले सिद्घू को भाजपा हर हाल में मनाना चाहती है। इसके लिए पार्टी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को मोर्चे पर लगाया है। भले ही शिअद ने भाजपा के साथ अगले 20 सालों तक गठबंधन बरकरार रखने की घोषणा की हो, मगर दोनों दलों के बीच गिले शिकवे का दौरान भविष्य में बड़े विवाद की ओर बढ़ सकता है।

राज्यसभा चुनाव बीतने के इंतजार में भाजपा

BJP and SAD gears up for sea battle in Punjab

भाजपा फिलहाल राज्यसभा की एक सीट पर शिअद का सहयोग हासिल करने के लिए चुप है, मगर पार्टी इसके बाद  चुपचाप नहीं बैठने वाली। खासतौर पर सीटों के सवाल पर भाजपा इस सीट पर चुनाव के बाद अपने तेवर में अचानक बदलाव करेगी।

पार्टी सिद्घू को अपनी रणनीति के हिसाब से आगे बढ़ाने के साथ-साथ विधानसभा में 23 की जगह 36 सीटें हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देगी। पार्टी ने इन सीटों की पहचान भी कर ली है। वहीं भाजपा अध्यक्ष शाह से सुखबीर से साथ मिलने गए शिअद के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हमने अपना रुख पहले ही साफ कर दिया है।

भाजपा को पहले की तरह 23 सीटें मिलेंगी, हां कुछ सीटों पर अदला बदली की बात मानी जा सकती है। इतना ही नहीं उक्त नेता ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा की एक सीट केलिए अगर भाजपा की ओर से सिद्घू के नाम का प्रस्ताव आया तो शिअद का सहयोग हासिल करना बेहद मुश्किल होगा। उक्त नेता के मुताबिक जब भाजपा को इस सीट के लिए हमारा वोट चाहिए तो उम्मीदवार पर सहमति भी जरूरी होगी।

सिद्घू की चुप्पी पर सवाल

BJP and SAD gears up for sea battle in Punjab

सिद्घू के नाम पर जहां सियासत और अटकलों का दौर उफान पर है। वहीं खुद सिद्घू खामोशी धारण किए हुए हैं। अध्यक्ष पद का प्रस्ताव और इसके लिए शिअद से नाता तोड़ने की शर्त सिद्घू ने सार्वजनिक रूप से नहीं रखी है।

भाजपा को जहां सिद्घू के अपनी पत्नी के साथ आम आदमी पार्टी का दामन थामने का डर सता रहा है, वहीं शिअद को लगता है कि सिद्घू खुद सियासत से दूर रह कर अपनी पत्नी के माध्यम से उसका चुनावी खेल गड़बड़ा सकते हैं।

जबसे सिद्घू की पत्नी ने शिअद से नाता न तोड़ने पर अपने परिवार के किसी सदस्य का चुनाव न लड़ने की घोषणा की है, तब से अटकलों का बाजार और गर्म हो गया है।

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