‘नमो लहर’ को लेकर भाजपा और संघ को सता रहा एक बड़ा डर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा काशी को लेकर तो जीत के प्रति आश्वस्त है लेकिन संघ और भाजपा नेतृत्व को आशंका सता रही है कि ‘नमो लहर’ कहीं इन सीटों पर ठिठक न जाए।
टिकट वितरण के बाद से काशी क्षेत्र की एक-दो सीटों को छोड़कर लगभग सभी सीटों पर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में उपजे असंतोष से चुनाव परिणाम प्रभावित न हों, इसके लिए तेजी से डैमेज कंट्रोल की कवायद की जा रही है।
इसी सिलसिले में मोदी के विश्वस्त और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल ने बुधवार की रात वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ गोपनीय बैठक की। इसमें कमजोर प्रत्याशी वाली सीटों पर पार्टी का ग्राफ बढ़ाने पर चर्चा हुई।
टिकट वितरण में भाजपा ने बरती लापरवाही
नेतृत्व इस बात पर एकमत है कि इन सीटों पर टिकट वितरण में लापरवाही बरती गई है। एक सुझाव यह भी आया कि ज्यादा से ज्यादा सीटों पर मोदी की सभाएं कराकर यहां भगवा परचम लहराया जा सके।
गौरतलब है कि पार्टी का ही एक खेमा लगातार यह कहकर ‘नमो लहर’ पर सवाल उठाता रहा है कि भाजपा व्यक्तिवादी दल नहीं है। यह लहर मोदी की नहीं, पार्टी की है।
वहीं, संघ और भाजपा का दूसरा खेमा मोदी के नेतृत्व में विश्वास जता रहा है। ऐन चुनाव के समय पार्टी इस मसले पर समीक्षा में जुटी हुई है।
काशी क्षेत्र के चौदह सीटों की चिंता
बैठक में शामिल एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक चर्चा में पूरा फोकस काशी क्षेत्र की 14 सीटों पर ही रहा। इसमें यह जानकारी भी मांगी गई कि किन-किन जिलों में कौन लोग असंतुष्ट चल रहे हैं, चुनाव प्रबंधन में कौन किस हैसियत से लगाया गया है और वह अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है या नहीं।
इसे लेकर भी मंथन किया गया कि पहले, दूसरे और तीसरे चरण के मतदान में तो वोटिंग परसेंटेज बढ़ा लेकिन जैसे-जैसे पूर्वांचल की ओर बढ़ रहे हैं, इसमें कमी आती जा रही है। काशी क्षेत्र की 14 सीटों में से मिर्जापुर और प्रतापगढ़ में तो गठबंधन के तहत अपना दल के प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं, सुल्तानपुर सीट पर वरुण गांधी के होने से भाजपा इस सीट को अपनी झोली में मानकर चल रही है। बनारस में भी किसी को टक्कर में नहीं माना जा रहा है लेकिन चंदौली, भदोही, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया आदि सीटों पर समीकरण क्या बन रहे हैं और उन्हें भाजपा के पक्ष में कैसे किया जाए, इस पर रामलाल ने फीडबैक लिए और चुनाव प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों को जरूरी निर्देश भी दिए।