LG की चिट्ठी का शिकार बने केजरीवाल
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आम आदमी पार्टी ने जनलोकपाल बिल के मुद्दे पर सरकार से निकलने का जो ‘सेफ एग्जिट प्लान’ बनाया था उसमें एलजी की चिट्ठी ने विपक्षी दलों को भी सेफ साइड दे दी।
सोची समझी रणनीति के तहत केजरीवाल सरकार का प्राथमिकता वाला जन लोकपाल बिल प्रस्ताव में सबसे बाद में रखा गया, लेकिन इसे असंवैधानिक बताने का पत्र स्पीकर के पास पहुंच जाने पर कांग्रेस व भाजपा को भी रास्ता मिल गया।
विधानसभा सत्र में ‘आप’ ने भ्रष्टाचार और भाजपा व कांग्रेस ने जिस तरह से संविधान की दुहाई दी, उससे स्पष्ट लगा कि केजरीवाल के इस्तीफा देने के बाद आगामी चुनाव में एक दूसरे पर इन्हीं मुद्दों को लेकर प्रहार होंगे।
आप ने तैयार कर रखा था एग्जिट प्लान
मुख्यमंत्री ने पहले ही घोषणा की थी कि अगर जनलोकपाल बिल का प्रस्ताव शुक्रवार को टेबल नहीं हुआ तो वे इस्तीफा दे देंगे।
उपराज्यपाल ने पहले भी इस बिल को केंद्र की स्वीकृति के बाद ही वैधानिक बताया था।
इसके बाद आम आदमी पार्टी सरकार की योजना थी कि इस बिल पर वे वोटिंग कराएंगे। अगर वोटिंग में इसका प्रस्ताव गिर जाता है तो जन लोकपाल बिल पास न करने का ठीकरा वह भाजपा व कांग्रेस पर फोड़ देगी और इस्तीफा देकर दोनों दलों की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों को लेकर आगामी चुनाव में जाएगी।
प्राथमिकता सूची में सबसे अंत में बिल
दोनों ही दलों ने सुबह इस चिट्ठी के बाद हंगामे के बीच दमदार तरीके से स्पष्ट किया कि वे जनलोकपाल बिल के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसे कानूनी रूप से रखा जाए।
सरकार का मानना था कि सदन के पहले दिन की तरह सत्र का दूसरा दिन भी हंगामे की भेंट न चढ़ जाए, इसलिए प्राथमिकता वाले जनलोकपाल बिल को प्रस्ताव में पांचवें नंबर पर रखा जाए।
बिल पेश करने पर उलझन में थी सरकार
बिल पेश होने से पहले ही विपक्ष को कई मुद्दे मिल गए। सदन शुरू होते ही बिल को असंवैधानिक बताने वाले एलजी के संदेश को स्पीकर द्वारा सभी सदस्यों को बताने पर हंगामा शुरू हो गया।
इस मामले में आम आदमी पार्टी घिरी हुई दिखाई दी। आखिर में यह बिल टेबल किया जाए या नहीं, इस पर वोटिंग हुई और प्रस्ताव गिर गया।
हालांकि मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट कर दिया कि उनकी आवाज संसद तक पहुंचेगी। इससे संकेत मिला कि आगामी लोकसभा चुनाव में वह भ्रष्टाचार व जनलोकपाल बिल पास न करने को मुद्दा बनाएंगे।
विधानसभा में ही इस्तीफे का दिया संकेत
विपक्ष की मंशा को समझते हुए केजरीवाल ने विधानसभा का टीवी चैनलों पर लाइव प्रसारण के दौरान कह दिया, ‘संविधान के लिए तो मैं अपनी जान भी दे सकता हूं।’ जाहिर है कि लोकसभा चुनाव में इन दो मुद्दों पर जबर्दस्त राजनीति होगी।