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गुजरातः बीजेपी, कांग्रेस ने दिया 16 महिलाओं को टिकट

Sat, 01 Dec 2012 03:48 PM IST
अहमदाबाद/एजेंसी
अहमदाबाद/एजेंसी Updated Sat, 01 Dec 2012 03:48 PM IST
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bjp and congress give 16 ticket to women in gujarat election

महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करने वाली बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए केवल 16 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है।

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पहले चरण में 13 दिसंबर को पश्चिम अहमदाबाद जिले की चार सीटों समेत सौराष्ट्र, दक्षिण गुजरात की 87 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव के लिहाज से बीजेपी ने जहां 11 महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, वहीं कांग्रेस ने महज पांच महिलाओं को प्रत्याशी बनाया है।
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इस साल चुनावी अखाड़े में पहली बार उतरी केशुभाई पटेल की गुजरात परिवर्तन पार्टी ने केवल एक महिला प्रत्याशी पर भरोसा जताया है। चुनावी राजनीति में बहुत कम महिलाओं की उम्मीदवारी पर गुजरात विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर गौरांग जानी ने कहा, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के बीच राजनीतिक जागरुकता कम है और शहरी इलाकों में केवल सफल महिला उम्मीदवारों को फिर से मौका दिया जाता है।
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जानी के मुताबिक राज्य सरकार ने अपनी ओर से महिलाओं के सशक्तिकरण तथा राजनीतिक सहभागिता के बारे में शैक्षणिक जागरुकता लाने के कदम नहीं उठाए हैं और कन्या भ्रूण हत्या, नवजात मृत्यु दर, उच्च कुपोषण दर आदि अहम सामाजिक विकास के संकेतकों में गुजरात की स्थिति अच्छी नहीं है।

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में ही पिछले कई साल से चुनाव नहीं होने का जिक्र करते हुए जानी ने कहा कि छात्र नेताओं का विकास कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में होता है।
   
महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठन गुजरात महिला संघ की अध्यक्ष इला पाठक ने भी इसी तरह के विचार रखते हुए कहा कि महिलाओं को राजनीति के लिए वर्जित माना जाता है और इस क्षेत्र में आने नहीं दिया जाता।
   
उन्होंने कहा कि पुरुष नेताओं का स्थानीय तौर पर और ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा संपर्क है वहीं राजनीति में बहुत अधिक महिलाएं नहीं आतीं इसलिए पार्टियां भी महिलाओं को कम मौके देती हैं।
   
2007 के राज्य विधानसभा चुनावों में 88 महिलाओं ने चुनाव लड़ा था जिनमें से 16 को विजय प्राप्त हुई। इन 16 विधायकों में से 15 भाजपा की थीं वहीं एक कांग्रेस से थीं। तब भाजपा ने 182 सीटों के लिए 22 महिलाओं को टिकट दिया था, वहीं कांग्रेस ने केवल 14 महिला उम्मीदवारों पर विश्वास जताया।
   
बसपा और लोजपा ने तब क्रमश: 5 और 3 महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया था। 29 महिलाएं निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरीं और शेष को पंजीकृत गैरमान्यताप्राप्त राजनीतिक दलों की ओर से उतारा गया।
   
अधिक महिलाओं को टिकट नहीं दिये जाने के सवाल पर भाजपा के मीडिया प्रकोष्ठ के संयोजक जगदीश भावसार ने पीटीआई से कहा, भाजपा ने पहले ही पार्टी में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की नीति को लागू किया है। संसद एक बार इस विधेयक को पारित कर दे तो हम महिलाओं को और अधिक सीटें देंगे।
   
उन्होंने कहा कि पहले संप्रग सरकार संसद में विधेयक पारित करे। उनकी पार्टी अध्यक्ष महिला हैं और वे अब भी विधेयक पारित कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भावसार ने यह दलील भी पेश की कि भाजपा ने पूर्ववर्ती चुनावों में और इस बार भी अन्य दलों की तुलना में अधिक महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है।

   
कांग्रेस द्वारा केवल पांच महिलाओं को उम्मीदवार बनाने के सवाल पर प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि स्थानीय निकायों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लाने वाली कांग्रेस पहली पार्टी है और आज कई महिलाएं ग्राम पंचायतों की प्रमुख हैं।

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