सुलह-सफाई के बजाए आक्रामक हुई भाजपा, संसद में सियासी संग्राम जारी
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संसद को चलाने में ललित गेट और व्यापम घोटाले की सियासी आंच का सामना कर रही मोदी सरकार ने विपक्ष के साथ सुलह सफाई की कोशिश छोड़कर आक्रामक रुख अपना लिया है।
इस क्रम में सरकार और भाजपा की ओर से सीधे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद पर निशाना साधने के बाद कांग्रेसी राज्य सरकारों को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति के तहत हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को भी घेरा गया।
एक दिन पहले बुधवार को भाजपा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के निजी सचिव का कथित स्टिंग वीडियो जारी कर कांग्रेस को बैकफुट पर ला दिया था। ऐसे में संसद में सरकार और विपक्ष के बीच जारी सियासी संग्राम के टलने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।
तीसरे दिन भी ठप रही दोनों सदनों की कार्यवाही
बृहस्पतिवार सुबह तक सरकार की योजना गतिरोध तोड़ने के लिए विपक्षी नेताओं से बातचीत का सिलसिला शुरू करने की थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली दोपहर में विपक्ष के नेताओं के साथ बैठक करने वाले थे।
हालांकि, इसी बीच राबर्ट वाड्रा की संसद के खिलाफ की गई टिप्पणी का मामला सामने आने के बाद सरकार ने इरादे से पलटते हुए हमलावर रुख में पैनापन लाने की रणनीति बनाई।
बताते हैं कि कार्यवाही शुरू से पहले पीएम मोदी की वरिष्ठ मंत्रियों के साथ हुई बैठक में विपक्ष के आगे झुकने के बदले तेवर और कड़ा करने की रणनीति बनी।
बैठक में पीएम ने भ्रष्टाचार के मोर्चे पर सरकार को घेर रहे विपक्ष को इसी मोर्चे पर घेरने के लिए और आक्रामक रुख अपनाने का मंत्र दिया।
सरकार और पार्टी की योजना विपक्ष शासित राज्य सरकारों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को सिलसिलेवार तरीके से उठाने की है। इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के मामले में मोर्चा खोला गया।
हरीश के बाद निशाने पर वीरभद्र
भाजपा ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के बाद हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि वीरभद्र ने अपने लाभ के लिए वेंचर एनर्जी एंड टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड की एक रद्द परियोजना को मंजूरी दी।
इसके लिए उन्होंने रिश्वत ली। जिस कंपनी की रद्द परियोजना को मंजूरी दी गई उसमें मुख्यमंत्री की पत्नी, बेटे और ओएसडी के शेयर हैं। जिस आनंद नाम के व्यक्ति ने परियोजना के लिए मुख्यमंत्री से संपर्क साधा उसके खाते में छह करोड़ रुपये जमा किए गए। पार्टी ने वीरभद्र पर स्कूटर और ऑयल टैंकर से सेबों की सप्लाई करने का भी आरोप लगाया।
मध्य प्रदेश में दिग्विजय को घेरने में जुटी
व्यापम घोटाले के गढ़ मध्य प्रदेश में भी भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के 10 सालों के कार्यकाल को खंगालने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
विधानसभा नियुक्तियों के मामले में एफआईआर के बाद राज्य में कांग्रेस नेता सरला मिश्रा की संदेहास्पद स्थिति में मौत की सीबीआई जांच की मांग एक बार फिर उठने लगा है।
व्यापम घोटाले को जोरशोर से उठाने के बाद विधानसभा में हुईं नियुक्तियों के पुराने मामले में दिग्विजय और पूर्व स्पीकर श्रीनिवास तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। सरला मिश्रा की मौत में दिग्विजय के भाई लक्ष्मण सिंह की भूमिका सवालों के घेरे में है।