नहीं रहे इतिहासकार बिपिन चंद्रा
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जाने माने इतिहासकार बिपिन चंद्रा का शनिवार सुबह निधन हो गया। वो 86 बरस के थे। भारत के राष्ट्रीय आंदोलन पर उनकी खास विशेषज्ञता थी और उन्हें महात्मा गांधी पर भारत के अग्रणीय विद्वानों में एक माना जाता था।
उनकी शुरुआती अहम किताबों में 'द राइज़ एंड ग्रोथ ऑफ इकॉनॉमिक नेशनलिज्म' भी शामिल है। 'इंडिया आफ़्टर इंडिपेंडेंस' और 'इंडियाज स्ट्रगल फॉर इंडिपेंडेंस' जैसी उनकी किताबें भी खासी चर्चित रही हैं।
उन्होंने शनिवार सुबह लगभग साढ़े छह बजे अंतिम सांस ली।
बेहतरीन पुस्तकों को लिखा
इतिहासकार बिपिन चंद्रा जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष रह चुके है।
अमेरिका के प्रख्यात स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले चंद्रा ने 'आधुनिक भारत का इतिहास', 'भारत का स्वतंत्रता संघर्ष' जैसी कई बेहतरीन पुस्तकें लिखी हैं।
चंद्रा आधुनिक भारत के आर्थिक और राजनीतिक इतिहास के विशेषज्ञ माने जाते थे। उनकी विशेषज्ञता राष्ट्रीय आंदोलन पर भी थी। इतना ही नहीं, उन्हें महात्मा गांधी के दर्शन के मामले में भी देश के सबसे बड़े जानकारों में एक माना जाता था।