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राहुल का अपनों पर नजर रखने का नया फंडा
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
Updated Thu, 29 Nov 2012 01:34 AM IST
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कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी अब अपने युवा संगठन के कामकाज को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। दरअसल, संगठन के कामकाज में ढिलाई को लेकर राहुल बेहद खफा हैं। लिहाजा, उनके निर्देश पर दिल्ली के युवा कांग्रेस के मुख्यालय में पदाधिकारियों की दफ्तर में उपस्थिति पर नजर रखने के लिए बायोमेट्रिक मशीन लगाई गई है, जबकि अखिल भारतीय युवा छात्र संघ में यह प्रणाली कुछ समय पहले से चल रही है।
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यह मशीन पदाधिकारियों के संगठन के दफ्तर में आने और जाने का पूरा रिकॉर्ड रखेगी। राहुल खुद अखिल भारतीय युवा कांग्रेस (आईवीसी) और अखिल भारतीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के प्रभारी हैं। दफ्तर में पदाधिकारियों का नदारद होना आम बात हो गई थी।
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सूत्रों के मुताबिक राहुल को कई युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसकी शिकायत की थी कि वह जब भी युवा कांग्रेस के दफ्तर जाते हैं, वहां उन्हें उनके राज्यों से संबंधित पदाधिकारी नहीं मिलते। मोबाइल फोन नंबर रिसेप्शन से मिल जाता है पर वे उसे उठाते नहीं हैं। उठाते भी हैं तो कह देते हैं कि वे अभी दिल्ली से बाहर हैं।
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सूत्रों के मुताबिक इस सिलसिले में जानकारी मांगी गई थी। मगर जब दफ्तर का अटेंडेंस रजिस्टर देखा गया तो पदाधिकारियों की उपस्थिति बिलकुल सही पाई गई। ज्यादातर पदाधिकारियों की उपस्थिति 80 से 95 प्रतिशत तक मिली। बाद में कई अटेंडेंस फर्जी पाई गईं। कुछ सचिव स्तर के पदाधिकारियों ने ऑफ द रिकॉर्ड यह बात स्वीकार भी की।
शीर्ष स्तर पर यह बात पहुंचने के बाद फर्जी उपस्थिति का मसला संगठन में बेहद बड़ा मुद्दा बन गया। लिहाजा, संगठन के दफ्तर में बायोमेट्रिक कार्ड लगाने का फैसला किया गया। अब हर पदाधिकारी की उपस्थिति हाईटेक तरीके से दर्ज होगी। इसमें फर्जीवाड़े की संभावना बिलकुल नहीं होगी। मशीन ने बुधवार से काम करना शुरू कर दिया।
हालांकि युवा कांग्रेस के अध्यक्ष राजीव सातव का कहना है कि बायोमेट्रिक प्रणाली स्टाफ के लिए लगाई गई है। पदाधिकारियों का इससे संबंध नहीं है। जबकि कई पदाधिकारियों ने कबूल किया कि यह मशीन उनकी उपस्थिति के रिकॉर्ड के लिए ही लगाई गई है।
इस बारे में युवा कांग्रेस के महासचिव विकास उपाध्याय ने अमर उजाला को कहा कि यह कदम बेहद अच्छा है। इससे पदाधिकारियों के कामकाज भी ठीक तरीके से रिकॉर्ड हो पाएगा कि आखिर वह कितने सक्रिय स्तर से संगठन के लिए काम कर रहे हैं। राजनीतिक प्रणाली के लिए ऐसे नियम होना जरूरी है।