जब स्मृति ईरानी ने मांग लिया मोदी का इस्तीफा!
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्रालय सौंपकर सभी को हैरत में डाल दिया है। माना जा रहा था कि नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा, लेकिन ईरानी के मामले में ऐसा नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया और विश्लेषकों के बीच वे चर्चा का विषय बनी हुई हैं। सरकार में काम करने के मामले में ईरानी का अनुभव 'शून्य' है। वे गुजरात से राज्यसभा की सांसद हैं। उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने खिलाफ अमेठी से चुनाव भी लड़ा था।
वे हार गईं थी, लेकिन तीन लाख से अधिक वोट हासिल कर सभी को चौंका दिया था। फिलहाल मोदी मंत्रिमंडल का सबसे चर्चित चेहरा वही है, जानिए स्मृति के बारे में चंद बातें-
राजनीति का एक दशक का अनुभव
स्मृति का राजनीतिक करियर लगभग एक दशक पुराना है। 2003 वे भाजपा में शामिल हुई थीं।
2004 में स्मृति ईरानी ने दिल्ली की चांदनीचौक सीट से कपिल सिब्बल के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ा था। राजग उस समय सत्ता में था और भाजपा को अपनी जीत का भरोसा था।
हालांकि, कांग्रेस ने भाजपा के मंसूबों पर पानी फेर दिया। उन चुनावों में भाजपा की करारी हार हुई थी। स्मृति ईरानी भी चुनाव हार गईं। 2004 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा की महाराष्ट्र इकाई का उपाध्यक्ष बना दिया गया।
....जब मांग था मोदी का इस्तीफे
2004 में लोकसभा चुनावों में भाजपा की हार के बाद स्मृति इरानी ने एक ऐसा फैसला लिया था, जिससे पार्टी भी मुश्किल में पड़ गई।
उन्होंने नरेंद्र मोदी को लोकसभा चुनावों में हार का जिम्मेदार ठहराते हुए धमकी दी कि अगर मोदी इस्तीफा नहीं देंगे तो वे आमरण अनशन पर बैठ जाएंगी।
हालांकि भाजपा आलाकमान ने जब ईरानी के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी, तब उनका जोश ठंडा हो गया। उन्होंने आमरण अनशन वापस ले लिया।
तेजी से बढ़ा राजनीतिक का ग्राफ
हालांकि भाजपा में स्मृति का ग्राफ तेजी से बढ़ा। 2004 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा की महाराष्ट्र इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया। टीवी की मशहूर एक्ट्रेस होने के कारण देखते ही देखते वे टीवी चैनलों पर भाजपा का चेहरा बन गईं।
वह पांच बार भाजपा की केंद्रीय कमेटी की कार्यकारी सदस्य बनीं। 2010 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया। बाद में उसी साल भाजपा ने महिला मोर्चा का अध्यक्ष बना दिया।
अक्टूबर, 2011 में वे गुजरात से राज्यसभ की सदस्य बनीं। 2014 लोकसभा चुनावों में उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ उन्हीं के गढ़ अमेठी में चुनाव लड़ा।
फेमिना मिस इंडिया में भी शामिल हुईं
छोटे पर्दे की बड़ी स्टार बनने से पहले स्मृति ने मॉडल बनने का सपना देखा था। खुद के पैरों पर खड़े होने के जज्बे के चलते 10वीं से ही उन्होंने पैसे कमाना शुरू कर दिया था। वे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का प्रचार करतीं और 200 रूपए रोजाना कमाती।
पंजाबी-बंगाली माता-पिता की तीन बेटियों में से एक स्मृति ने ग्लैमर की दुनिया में जाने से पहले फैशन कांटेस्ट में भी भाग लिया।
1998 में वे फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में शामिल हुईं थी। हालांकि वे फाइनल तक नहीं पहुंच पाई। उसके बाद उन्होंने मुंबई का रास्ता चुन लिया। मुंबई में उन्होंने मैक्डॉनल्ड के आउटलेट में नौकरी कर ली।
भारतीय बहू के रूप में घर-घर में पहचानी गईं
उन्हें चंद ही दिनों में पहला असाइनमेंट मिल गया। टीवी शो 'ऊ ला ला ला' के एक एपिसोड में एंकरिंग करने के लिए उन्हें बुलाया गया। उस समय शो की एंकर अभिनेत्री निशा कोठारी थी।
एक ही एपिसोड ने उनके किस्मत के दरवाजे खोल दिए। बालाजी टेलीफिल्म्स की मालकिन एकता कपूर उन दिनों अपने नए सोप ओपेरा 'क्योंकि...सास भी कभी बहू थी' के लिए बहू यानी तुलसी की तलाश कर रही थी। एकता की नजर स्मृति पर पड़ी। उन्हें तुलसी के कैरेक्टर के लिए चुन लिया गया।
टीवी दर्शकों के बीच तुलसी का चरित्र बहुत ही लोकप्रिय हुआ। भारतीय बहू के रूप में स्मृति घर-घर में पहचानी जाने लगी।