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मुलायम सिंह को भी भारी पड़ी मोदी से नजदीकी

Mon, 09 Nov 2015 10:37 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 09 Nov 2015 10:37 AM IST
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Bihar verdict gave Mulayam a big jolt

बिहार चुनाव के नतीजे आ गए हैं और जनता ने एक बार फिर प्रदेश में नीतीश कुमार को कमान सौंप दी है। लेकिन महागठबंधन की जीत से जिसे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है वह और कोई नहीं नेताजी यानि मुलायम सिंह यादव हैं।

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खुद ही महागठबंधन का आह्वान करते हुए नीतीश का नाम सीएम पद के लिए आगे करने वाले मुलायम ही ऐनवक्त पर महागठबंधन से अलग हो गए।

आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को उसकी हैसियत के मुताबिक सीटें नहीं दी। लालू यादव के रिश्तेदार और जनता परिवार में सहयोगी रहे मुलायम सिंह यादव को ऐन मौके पर जनता परिवार छोड़ना घाटे का सौदा साबित हुआ।
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अगर वह जनता परिवार के साथ रहते तो बिहार में समाजवादी पार्टी भी इस जीत में शामिल होती। अब हालत ये हो गयी है कि महागठबंधन से अलग होकर तीसरा मोर्चा बनाने वाली समाजवादी पार्टी के एक भी उम्मीदवार को जीत हासिल नहीं हो सकी है। जबकि इस बार पार्टी ने सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ी थी।

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एनडीए को जिताने की अपील की थी

Bihar verdict gave Mulayam a big jolt

गौरतलब है कि अपनी जिद पर अड़े मुलायम ने तीसरा मोर्चा बनाया था। मुलायम की समाजवादी पार्टी के अलावा इसमें एनसीपी, पप्पू यादव की जनअधिकार पार्टी भी शामिल थी।

साथ ही एक दो छोटी पार्टियां भी इसी गठबंधन की छतरी तले आ गई थीं। लेकिन एनसीपी ने चुनाव पूर्व ही मुलायम के इस मोर्चे से किनारा कर लिया था।

इसके बावजूद चुनाव को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुके मुलायम सिंह यादव ने पूरा दम झोंकने की बात कही थी। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ा सारी लड़ाई भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और महागठबंधन के बीच तक ही सिमट गई थी।

समाजवादी पार्टी और उसका गठबंधन कहीं भी लड़ाई लड़ता नहीं दिख रहा था। इसका अंदाजा इस से भी लगाया जा सकता है कि यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा प्रमुख की एक दो रैलियों के अलावा किसी बड़े सपा नेता ने बिहार में कोई बड़ी रैली नहीं की।

साथ ही मुलायम ने भी अपनी रैली में एनडीए की सरकार बनाने की बात तक कह डाली। कुल मिलाकर वे चुनाव प्रचार में मोदी के करीबी की तरह दिखाई दिए।

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