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समोसा, कचौड़ी के टैक्स पर बिहार सरकार की सफाई

Sat, 16 Jan 2016 04:51 PM IST
Updated Sat, 16 Jan 2016 04:51 PM IST
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Bihar govt clarifies, tax on only costly packaged samosas

बिहार में समोसे कचौड़ियों पर टैक्स लगाने के फैसले से हुई फजीहत के बाद सरकार ने अपनी सफाई दी है। सरकार का कहना है कि यह टैक्स केवल उन समोसों और कचौड़ियों पर लगा है जो 600 रुपये प्रति किलो से अधिक की कीमत पर बिकते हैं। यह टैक्स भोजनालयों और होटलों में बिकने वाले समोसों पर लागू नहीं होता।

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आगामी महीनों में प्रदेश में शराब बिक्री पर लगने वाले प्रतिबंध और वार्षिक उत्पाद कर में आई गिरावट की वजह से सरकार को करीब 4000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई के लिए मंत्रिमंडल ने 13 जनवरी को यह फैसला किया कि सभी विशिष्ट सामानों पर वैट लगाया जाएगा।
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इसमें 500 रुपये प्रति मीटर से ऊपर बीकने वाले कपड़ों, 2,000 रुपये से ज्यादा की साड़ियों, सौंदर्य प्रसाधनों, सुगंधित वस्तुओं, इंवर्टर और ट्रांसफॉर्मर आदि शामिल हैं। इनमें समोसे और कचौड़ियों को भी शामिल किया गया।
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विपक्ष ने साधा निशाना

Bihar govt clarifies, tax on only costly packaged samosas

समोसे और कचौड़ियों पर टैक्स लगाने की बात जब सामने आई तो सोशल मीडिया पर इसका जमकर विरोध हुआ। लोगों ने तरह तरह से पोस्ट साझा किए। वहीं भाजपा जैसी विरोधी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को लेकर नीतीश सरकार पर निशाना साधा। बीजेपी ने कहा कि इस तरह के टैक्स से राजस्व में कोई बढ़ावा नहीं होगा। व्यावसायिक कर विभाग के अधिकारियों ने कहा इस इस मुद्दे को जबरदस्ती 'हो हल्ला' मचा रखा है। दूसरे राज्यों में यह टैक्स पहले से ही लागू है।

वहीं भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी का कहना है कि, 'बिहार के मुकाबले अन्य पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड जैसे राज्यों में यह टैक्स मात्र पांच फीसदी ही है। खाद्य पदार्थों पर इस तरह के टैक्स से सरकार का राजस्व नहीं बढ़ने वाला।'

उन्होंने कहा कि कपड़ो पर टैक्स लगाने का फैसला तो पूरी तरह से अव्यावरिक है। कपड़ा व्यापारी अपना टैक्स बचाने के लिए अपने कपड़ों के दाम हमेशा निर्धारित टैक्स कीमत से कम ही दिखाएंगे। इस फैसले से पहले सरकार ने होम वर्क नहीं किया।

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