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बच्चों को खाना देने से पहले शिक्षकों को चखना होगा
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 18 Jul 2013 01:40 PM IST
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बिहार में मिड डे मील खाने से बच्चों की मौत के बाद बिहार सरकार ने गुरूवार को एक विज्ञापन जारी किया है। इसमें बच्चों को खाना देने से पहले उसकी गुणवत्ता जांचने के निर्देश दिए गए हैं।
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विज्ञापन में बच्चों को खाना देने से पहले उसकी जांच के लिए प्रिंसिपल और खाने बनाने वाले को चखने के लिए कहा गया है।
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इतना ही नहीं स्कूलों के निरीक्षण पर जाने वाले पदाधिकारियों को भी निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन को चख कर उसकी जांच करने के आदेश दिए हैं।
शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी इस विज्ञापन में यह जिक्र करते हुए कि सरकार ने पहले भी इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए हैं स्कूलों को खाने की गुणवत्ता को सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
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विज्ञापन में आगे प्रधानाध्यापक को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों के भोजन के लिए आने वाले खाद्य पदार्थों का भंडारण कीटनाशक, खाद आदि के साथ न किया जाए।
मिड डे मील खाने से छपरा में 25 बच्चों की मौत के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और शिक्षामंत्री पीके शाही पर काफी दबाव बना हुआ है और उनसे इस्तीफे के मांग भी की गई है।
पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रह्मण्यम ने कहा है कि दोनों मंत्रियों को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए।
हांलाकि एक प्रेसवार्ता के दौरान बुधवार को पीके शाही ने इस घटना को राजनीतिक साजिश करार दिया था और स्कूल की प्रिंसिपल व उनके पति को दोषी ठहराया था।
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मामले की जांच के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जिन बच्चों की जान गई है उनके परिवार को दो लाख का मुआवजा देने की घोषणा की है।
मंगलवार को बिहार के छपरा ज़िले में विषाक्त भोजन खाने से जिन 22 बच्चों की मौत हुई थी उनमें से तीन बच्चों के परिवारों ने उन्हें स्कूल परिसर में ही दफ़ना दिया है।
विरोध के लिए स्कूल में दफनाए शव
बीबीसी हिंदी के मुताबिक जहरीला भोजन खाने से जिन 22 बच्चों की मौत हुई थी उनमें से तीन बच्चों के परिवारों ने उन्हें स्कूल परिसर में ही दफना दिया है।
सोलह बच्चों को या तो स्कूल की दीवार के पास या सड़क के दूसरी तरफ दफानाने की जगह ढ़ूंढी गई है। परिवार स्कूल परिसर में दाह संस्कार कर अपना विरोध दर्ज करवा रहे हैं।
बच्चों ने मिड डे मील खाने से किया मना
इस भयावह घटना से बिहार में बच्चे इतने डर गए हैं कि हजारों बच्चों ने मिड डे मील खाने से इंकार कर दिया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बच्चों को समझाने के बावजूद वे खाना छूने से भी मना कर रहे हैं या खाना कूड़ेदान में फेंक रहे हैं।
मिड डे मील योजना के निदेशक लक्ष्मणन के अनुसार बच्चों के माता-पिता ने उन्हें पहले ही बताकर भेजा है और खाना छूने से भी मना किया है।