फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   bihar election second half

हाफ-टाइम की सीटी बजी, भाजपा ने गियर बदला

Fri, 30 Oct 2015 05:23 PM IST
राजेन्द्र तिवारी/ बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
राजेन्द्र तिवारी/ बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए Updated Fri, 30 Oct 2015 05:23 PM IST
विज्ञापन
bihar election second half

हम बिहार चुनाव के हाफ-टाइम पर खड़े हैं। यह न सिर्फ महत्वपूर्ण है बल्कि दिलचस्प भी है कि भारतीय जनता पार्टी ने कितनी बार अपना कथानक बदला है।

विज्ञापन


यह चतुर रणनीति का हिस्सा है या फिर चक्रव्यूह में फंस जाने की तिलमिलाहट, ये तो अभी साफ नहीं।

पांच दौर तक फैले मतदान के बीच सिर्फ मौसम ही नहीं बदला है।

एनडीए के रणनीतिकारों को बहुत यकीन था कि लालू और नीतीश के वोट एक दूसरे को नहीं मिलेंगे।

नरेंद्र मोदी सलामी बल्लेबाज की तरह आए और उन्होंने आते ही चार सभाएं की और उन्होंने सीधे बिहार से पूछा कि कितने पैसे काफी होंगे, वोट के बदले।

देर में बंटे टिकट

bihar election second half

तब तक एनडीए के टिकट भी नहीं बंटे थे और पार्टी सहयोगियों में एका के साथ इस बात का भरोसा भी था कि जीत उनकी राह में पलक-पांवड़े बिछा कर बैठी है।

टिकट बंटने का सिलसिला सितंबर तक खिंच गया। नेता खींचतान और असंतोष की खुली नुमाइश लगाकर बैठ गए। चाहे आर के सिंह का बयान हो या जीतनराम मांझी और रामविलास पासवान के बीच तनातनी।

84 सीटें सहयोगियों को देने के बाद भी, भाजपा न अपने सहयोगियों को संतुष्ट कर पाई, न अपने कार्यकर्ताओं को। तब तक महागठबंधन के सीटों की घोषणा एक झटके में हो गई, लालू-नीतीश के बीच यह समझ जमीनी तौर पर दिखने लगी थी।

प्रचार शुरू हुआ तो एनडीए ने विकास के वादे के साथ-साथ नीतीश को अहंकारी, धोखेबाज और लालू को जंगलराज का पर्याय बताना शुरू किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

लालू के जंगलराज और दागदार इतिहास से पड़ेगा फर्क?

bihar election second half

भाजपा नेताओं ने पिछले 25 साल के लिए लालू और नीतीश से हिसाब मांगना शुरू किया और लालू को जंगलराज पर घेरना शुरू किया।

विकास का सिक्का विशेष पैकेज के साथ प्रधानमंत्री पहले ही जनता के बीच फेंक चुके थे लेकिन इस पैकेज को नीतीश कुमार ने रीपैकेजिंग करार दिया।

सितंबर के पहले हफ्ते में केंद्र सरकार की तरफ से पैकेज का फुल पेज विज्ञापन अखबारों में आ रहा था, उसी समय राज्य सरकार का फुल पेज विज्ञापन भी छप रहा था जिसमें पैकेज के विवरण के साथ पूछा जाता था कि इसमें नया क्या है?

इस बीच महागठबंधन की ओर से नीतीश कुमार ने सात सूत्र जारी किए और कहा कि अगर वे जीते तो उनकी सरकार इन सात सूत्रों पर ही चलेगी। इस बीच डीएनए विवाद, चंदन-भुजंग, जंगलराज-2, मंडल-2 जैसी बातें भी हुईं।

इसके जवाब में नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी-अमित शाह के बाहरी होने का मुद्दा उठाया, कहा कि बाहरी नहीं बिहारी चाहिए।

विज्ञापन

आरक्षण का मुद्दा बना सिरदर्द

bihar election second half

20 सितंबर को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण की समीक्षा वाला बयान आया, लालू प्रसाद ने इस बयान को पकड़ लिया और इसे लोगों के बीच ले गए।

हालांकि पहले और दूसरे चरण के मतदान से पहले तक भाजपा ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और प्रधानमंत्री ने अपनी रैलियों में इसका जिक्र तक नहीं किया।

हालांकि कुछ दिन बाद उन्हें कहना पड़ा कि आरक्षण हर हाल में जारी रहेगा और वे जान देकर भी उसे कायम रखेंगे, बीफ का मुद्दा भी आया जिस पर एक बयान देकर लालू प्रसाद फंसते दिखाई दिए लेकिन समय रहते लालू प्रसाद ने खुद को करेक्ट करने की कोशिश की।

कुर्सी के लिए टूटी भाषा की मर्यादा

bihar election second half

इस दौरान शैतान, नरपिशाच, महापिशाच, ब्रह्म पिशाच जैसे शब्द भी उछले, बात शुरू तो विकास से हुई थी।

दुर्गा पूजा खत्म होते-होते भाजपा के सुर बदलने लगे, दूसरे राउंड का मतदान खत्म होते-होते ही भाजपा के खेमे में सब वैसा नहीं रहा, जैसे शुरू में था।

कई जगह चुनावी होर्डिंग बदलते दिखाई दिए। जहां नरेन्द्र मोदी और अमित शाह की जगह स्थानीय नेताओं के चेहरे भी दिखलाई देने लगे। यकायक प्रधानमंत्री को अति-पिछड़ा बताया जाने लगा।

इस बीच, आरएसएस के उत्तर-पूर्व क्षेत्र के कार्यवाहक डा. मोहन सिंह के नाम से एक प्रेस रिलीज भाजपा कार्यालय से जारी की गई, इस प्रेस रिलीज में कहा गया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्य सरसंघचालक डाक्टर मोहन भागवत ने आरक्षण के संबंध में जो विचार दिया था, उसे तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जा रहा है।

'बीजेपी हारी तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे'

bihar election second half

प्रधानमंत्री ने नीतीश-लालू पर पिछड़ों, अति पिछड़ों और दलितों के आरक्षण में से 5 फीसदी दूसरे धर्म को देने की साजिश करने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री ने इस बीच छह सूत्र भी उछाले- बिजली, पानी, सड़क, पढ़ाई, कमाई और दवाई।

इस बीच, भाजपा की ओर से यह बयान भी आने लगे कि बिहार चुनाव के नतीजे केंद्र की एनडीए सरकार के कामकाज पर जनमत संग्रह नहीं माने जा सकते, फिर अमित शाह ने कह दिया कि अगर एनडीए बिहार चुनाव हारा तो पाकिस्तान में पटाखे फूटेंगे।

बिहार में मतदान के दो दौर और बाकी हैं, जीत-हार का पता तो नतीजे आने के बाद लगेगा लेकिन खेल अब सेकेंड हाफ में चला गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed