बिहार चुनाव परिणाम का यहां भी पड़ेगा असर
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बिहार के चुनाव परिणाम का असर संसद के आगामी शीत सत्र में भी दिखाई देगा। पहले से ही आक्रामक विपक्ष को सरकार के खिलाफ एकजुट होकर हमलावर होने का मौका मिल गया है। कांग्रेस ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा की पराजय के बाद से ही संसद में सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।
अब बिहार के बाद उसका रुख और हमलावर होगा। नवंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होने वाले संसद के शीतकालीन सत्र के लिए सरकार के खिलाफ विपक्ष के पास दादरी की घटना, कलबुर्गी हत्या और हरियाणा के दलितों की हत्या का मुद्दा पहले से ही है। जिनके जरिये उसकी रणनीति संसद में सरकार को घेरने की है।
इस बीच कांग्रेस पार्टी ने पीएम से विदेश यात्रा छोड़ किसान, दलित और गरीबों के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। संसद में विपक्ष मोदी के विदेश दौरों पर भी निशाना साधेगा।
सत्र के दौरान भी स्थिति ऐसी है कि पीएम विदेश दौरे पर रहेंगे। सरकार को अर्थिक सुधार के लिहाज से अहम माने जा रहे जीएसटी बिल को संसद से पारित करवाने में चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
विपक्ष को साधने की होगी चुनौती
विपक्ष के विरोध की वजह से सरकार को पहले ही भूमि अधिग्रहण जैसे अहम विधेयक पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े हैं। बिहार के बाद सरकार के रणनीतिकारों की असली अग्निपरीक्षा अब संसद में भी होगी।
सरकार को आर्थिक विकास की गाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। उसे विपक्ष को भी साधकर आगे बढ़ना होगा। उधर, परिणाम के बाद विपक्ष ने अपने मंसूबों का इजहार करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है सरकार के खिलाफ उसके अभियान में नरमी नहीं आएगी।