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क्या मांझी ले लेंगे लालू-नीतीश की जगह?

Tue, 03 Feb 2015 01:39 PM IST
नीरज सहाय/बीबीसी हिंदी डॉटकॉम, पटना
नीरज सहाय/बीबीसी हिंदी डॉटकॉम, पटना Updated Tue, 03 Feb 2015 01:39 PM IST
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Bihar Elections 2015 - Jitanram Manjhi to take place of Lalu-Nitish

बिहार में विधानसभा चुनाव इस साल अक्तूबर-नवंबर में होने की संभावना है, लेकिन उसे लेकर राज्य में अभी से सियासी सरगर्मी शुरू हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का विजय अभियान बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन की चिंता का सबसे बड़ा कारण है।

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सत्तारूढ़ जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) मोदी प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के समाजवादी दलों के विलय की कोशिश में लगे हैं।

प्रस्तावित विलय के बाद नेता नीतीश कुमार होंगे या लालू प्रसाद इसका फैसला तो अब तक नहीं हुआ है, लेकिन राज्य के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी एक तीसरे विकल्प के रूप में उभरते नजर आते हैं।
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मांझी के बयानों और उनके मजबूत होते दलित वोट बैंक ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी है कि पार्टी न उन्हें हटा सकती है और न पद पर बनाये रखना चाहती है।

इस परिस्थिति ने बिहार के चुनाव को दिलचस्प मोड़ की तरफ ले जाना शुरू कर दिया है।

विलय की संभावनाएं

Bihar Elections 2015 - Jitanram Manjhi to take place of Lalu-Nitish

जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह कहते हैं कि भाजपा के साम्प्रदायिक हथकंडों का सशक्त जवाब देने के लिए यह विलय जरूरी है। उनका कहना है, "विधायक दल और पार्टी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगामी विधान सभा चुनाव लड़ने का फैसला लिया है और जीतन राम मांझी को सरकार संभालने की जिम्मेदारी दी गई है।"

राजद विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीक़ी कहते हैं कि विलय होना तय है और नेता का नाम सर्वसम्मति से तय किया जाएगा। उन्होंने कहा, "इस चुनाव में हमारा वोट नहीं बिखरेगा। एकजुट रहेंगे और परिवर्तन की लड़ाई लड़ेंगे।"

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पाण्डेय के अनुसार, "संभावित विलय को दोनों दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं की स्वीकार्यता नहीं मिल रही है, बिहार सरकार और जदयू दो भागों में बंटी है।"

उनका मानना है कि विलय के बाद भाजपा के लिए राजनीतिक राह आसान होगी और भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होना स्वाभाविक हो जाएगा।

भाजपा का कहना है कि जीतन राम मांझी को एक निश्चित कार्य अवधि के लिए राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया है। उन्हें पद पर बने रहने देना चाहिए।

मांझी बेहतर विकल्प?

Bihar Elections 2015 - Jitanram Manjhi to take place of Lalu-Nitish

चुनावी राजनीति को अलविदा कह चुके राजद और जदयू दोनों का अनुभव रखने वाले पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी कहते हैं, "लोक सभा चुनाव के नतीजों से लगता है कि भाजपा के पक्ष में चल रही लहर से बिहार भी बच नहीं पाएगा।"

जीतन राम मांझी के नेतृत्व के मुद्दे पर तिवारी की राय है कि कमजोर वर्ग में नीतीश कुमार से अधिक मांझी की पैठ बनी है और अगर मांझी के नेतृत्व में चुनाव नहीं होगा तो उस तबके को एकजुट रख पाना मुश्किल होगा।

शिवानंद तिवारी मानते हैं कि अगर भाजपा को रोकना है तो मांझी बेहतर विकल्प हैं।

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