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बिहार: जान बचाने के लिए दलितों ने छोड़ा गांव

Sun, 28 Sep 2014 11:44 AM IST
Updated Sun, 28 Sep 2014 11:44 AM IST
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bihar dalit escape village

बिहार के एक गांव के 350 से अधिक दलित अपने गांव को छोड़ कर चले गए हैं। यह गांव गया ज़िले के टेकारी प्रखंड का पुरा गांव है। इस गांव के लगभग सौ दलित परिवार लगातार मिल रही धमकी के कारण 25 सितंबर को गांव से पलायन कर गए।

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पलायन करने वालों में से एक ग्रामीण लालजीत कुमार मांझी ने बीबीसी हिंदी को फ़ोन पर बताया कि एक हत्या के अभियुक्तों के परिजनों की ओर से दिए जा रहे धमकी के कारण वे सब गांव छोड़ने पर मजबूर हुए हैं।
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घटना के संबंध में गया के ज़िलाधिकारी संजय कुमार अग्रवाल ने बीबीसी को बताया कि ज़िला प्रशासन इन ग्रामीणों का विश्वास हासिल कर उन्हें गांव लौटाने के प्रयासों में जुटा है।
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उन्होंने बताया कि हत्या के मुख्य अभियुक्त ऋषि शर्मा को शनिवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया गया और गांव में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। साथ ही गांव के दलित टोले में पुलिस चौकी के स्थापना को भी स्वीकृति दे दी गई है।

सूचना के मुताबिक़ 19 सितंबर की रात महादलित समुदाय के एक युवक अर्जुन मांझी की हत्या कर दी गई थी। हत्या का संबंध सहकारी समिति (पैक्स) चुनाव से जुड़ा बताया जा रहा है।

गांव छोड़ने का सामूहिक फैसला

bihar dalit escape village

हत्या से संबंधित एफ़आईआर में गांव के ही सवर्ण जाति के सात लोग अभियुक्त हैं। ग्रामीणों के अनुसार एफ़आईआर के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगी और फिर जब पुलिस सुरक्षा मुहैया कराने में विफल रही तो उन्होंने सामूहिक रूप से गांव छोड़ने को फ़ैसला किया।

ग्रामीण अर्जुन मांझी के अनुसार ग्रामीणों की योजना गया जाकर धरना देने की थी लेकिन प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद वे टेकारी प्रखंड स्थित मोटीवेशन सेंटर में शरण लेने को तैयार हुए।

ग्रामीणों की मांग है कि सुरक्षा के लिहाज़ से सरकार उन्हें किसी दूसरे जगह पर बसाए। इस संबंध में ज़िलाधिकारी का कहना है कि ग्रामीणों को दूसरी जगह बसाना आसान है लेकिन इससे पीड़ित परिवारों की परेशानी हल नहीं होगी।

ज़िलाधिकारी ने कहा कि उन्होंने ग्रामीणों से लौटने का आग्रह किया है। भविष्य में ज़िला प्रशासन पीड़ित परिवारों को न सिर्फ़ सुरक्षा मुहैया कराएगा बल्कि उनके टोले को बिजली से जोड़ा जाएगा और वहां विकास संबंधी दूसरे कामों को जल्द से जल्द अमली जामा पहनाया जाएगा।

दूसरी ओर बिहार राज्य अनुसूचित जाति आयोग की दो सदस्यीय टीम रविवार को प्रभावित लोगों से मिलकर घटना की जांच करेगी। यह जानकारी देते हुए आयोग के अध्यक्ष विद्यानंद विकल ने बताया कि उन्होंने ज़िला प्रशासन को दलितों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विकल ने यह भी कहा कि लक्ष्मणपुर बाथे और बथानी टोला के अभियुक्तों की रिहाई के कारण भी सूबे में दलित उत्पीड़न की ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।

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