गांधी मैदान भगदड़: सीएम ने माना, हुई प्रशासनिक चूक
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गांधी मैदान में शुक्रवार को रावण दहन के बाद भगदड़ में 33 लोगों की मौत के मामले में बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने प्रशासनिक चूक की बात स्वीकार की है। उन्होंने माना है कि प्रशासन ने उस तरह के इंतजाम नहीं किए थे जैसा कि लाखों की भीड़ को संभालने के लिए किए जाने चाहिए थे। साथ ही सीएम ने कहा कि हादसे की जांच जारी है और रिपोर्ट आने तक दावे के साथ कुछ भी नहीं कहा जा सकता।
मुख्यमंत्री ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विपक्ष की ओर से प्रशासनिक जांच को लीपापोती बताए जाने के बारे में पूछे जाने पर मांझी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होगी। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो प्रशासन हादसे की दोबारा जांच कराएगा, लेकिन किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। पुख्ता इंतजाम नहीं होने के बारे में पूछे जाने पर सीएम ने कहा, ‘मैं पहले के हादसों के बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन इस हादसे में समन्वय की कमी दिख रही है। आगे ऐसे चूक न हो इसकी ठोस व्यवस्था की जाएगी।’ विपक्ष के आरोपों पर मांझी ने कहा कि इस तरह के हादसे दूसरे राज्यों में भी होते हैं। ऐसे आयोजनों के दौरान लोगों की भी कुछ जिम्मेदारी बनती है। गांधी मैदान में शुक्रवार को जो कुछ हुआ उसमें प्रशासन के साथ-साथ लोगों ने भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई।
उधर, विपक्ष ने भगदड़ के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने हादसे की प्रशासनिक जांच को लीपापोती की कोशिश करार दिया है और मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी हादसे के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।
'दम घुटने से हुईं अधिकतर मौतें'
गांधी मैदान में भगदड़ में मारे गए लोगों में से अधिकतर लोगों की मौत दम घुटने की वजह से हुई। इस बात की जानकारी शनिवार को पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (पीएमसीएच) के अधीक्षक महेश्वर प्रसाद ने दी। उन्होंने बताया कि हादसे में 33 लोगों की मौत हुई है, जबकि 29 घायलों का पीएमसीएच में इलाज चल रहा है।
प्रसाद ने बताया कि अब तक मरने वाले 31 लोगों की पहचान हो चुकी है। मरने वालों में पांच पुरुष और 28 महिलाएं तथा बच्चे हैं। उन्होंने बताया कि हादसे में मरने वाले लोगों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। इसमें अधिकतर लोगों की दम घुटने से मौत होने की पुष्टि हुई है। साथ ही प्रसाद ने कहा कि अगर गांधी मैदान में एंबुलेंस की सही व्यवस्था होती तो कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं।
पटना प्रशासन ने हादसे के 16 घंटे बाद मामले में आधिकारिक बयान जारी किया। प्रशासनिक लापरवाही के आरोप का उत्तर देते हुए पटना के जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह सचेत था, लेकिन भीड़ अधिक थी। पत्रकारों के सवालों के उत्तर में एसएसपी मनु महाराज ने किसी प्रकार के लाठीचार्ज से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज से साफ हो गया कि गांधी मैदान के चार गेट आम लोगों के लिए खुले हुए थे। साथ ही लाठीचार्ज के कोई सबूत नजर नहीं आ रहे हैं।
सड़क सफाई पर भड़के लोग
पुलिस शनिवार सुबह लाव-लश्कर के साथ गांधी मैदान के पास स्थित राम गुलाम चौक पहुंची और सड़क की साफ-सफाई कराने लगी। लोगों ने इसका विरोध किया, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। बाद में पुलिस ने बल प्रयोग किया और कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया।
भगदड़ की जांच शुरू, मंगलवार को होगी जन सुनवाई
गांधी मैदान में भगदड़ की जांच के लिए बनी दो सदस्यीय समिति ने शनिवार को हादसे की छानबीन शुरू कर दी। समिति में एडीजी गुप्तेश्वर पांडेय और गृह सचिव आमीर सुबानी शामिल हैं।
दोनों अधिकारी शनिवार को घटना स्थल पर पहुंचे और छानबीन की। उन्होंने पीएमसीएच जाकर घायलों से भी बातचीत की। बाद में मीडिया से बातचीत में गृह सचिव ने बताया कि मंगलवार सुबह 10 बजे डीएम कार्यालय में मामले में जन सुनवाई होगी। इसमें आम लोग भगदड़ के संबंध में बयान दर्ज करा सकते हैं।
उधर, पीएमसीएच में अव्यवस्था को लेकर शनिवार को आम लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। सुबह पोस्टमार्टम रूम का ताला तोड़ने के बाद भी जब अस्पताल प्रबंधन ने लोगों को जानकारी देने के लिए कोई मेडिकल बुलेटिन जारी नहीं किया, तो लोग उग्र हो गए। वहां तैनात पुलिस कर्मियों ने उन्हें खदेड़ कर परिसर से बाहर कर दिया। इसके बाद लोगों ने अशोक राजपथ को जाम कर दिया और प्रदर्शन किया।
स्वास्थ्य मंत्री को 16 घंटे बाद आया ख्याल
गांधी मैदान में भगदड़ ने भले ही सबका दिल द्रवित कर दिया हो लेकिन प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह को हादसे के हताहतों व घायलों का ख्याल 16 घंटे बाद आया और तब जाकर वे पीएमसीएच पहुंचे। यहां अस्पताल के दरवाजे पर ही उन्हें हताहतों के रिश्तेदारों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। मंत्री जब अस्पताल से निकले तो लोगों ने उनकी कार को घेर लिया और नारेबाजी की।
हादसा नहीं, हत्या: चिराग पासवान
यह हादसा नहीं, बल्कि हत्या है। ऐसी लापरवाही की सजा निर्धारित होनी चाहिए। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। स्वास्थ्य मंत्री घटना के 16 घंटे के बाद घायलों को देखने आते हैं। लालू प्रसाद यादव राज्य सरकार के साथ हैं। वे कहते हैं कि यह प्रशासनिक चूक है, लेकिन यह नहीं बताते कि जिम्मेदार कौन है।
उच्चस्तरीय जांच हो : नीतीश कुमार
भगदड़ में अनेक लोगों की हुई मौत से मुझे गहरा आघात लगा। यह अत्यंत दुखद और मार्मिक घटना है। इस घटना की तत्काल उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए।
दोषियों के खिलाफ हो सख्त कार्रवाई : लालू प्रसाद
भगदड़ की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से दु:खी और मर्माहत हूं। अस्वस्थ होने के कारण घटनास्थल पर नहीं पहुंचने पर अफसोस है। यह प्रशासनिक चूक का मामला लगता है। दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।