मुसलमानों को लुभाने के लिए भाजपा को 'नई मंजिल' का सहारा
बिहार विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने के लिए भाजपा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय का सहारा लेगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्रालय जून में बिहार के फुलवारी शरीफ से अपनी नई और महत्वाकांक्षी योजना ‘नई मंजिल’ की शुरुआत करेगी।
योजना का शुभारंभ वित्त मंत्री अरुण जेटली करेंगे। यह योजना मदरसों, मकतबों और दारुल-उलूम के आधुनिकीकरण से जुड़ा है।नई मंजिल योजना के जरिए जहां इन संस्थाओं में पढ़ने वालों को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।
वहीं उच्च शिक्षा के लिए इन्हें जामिया मिलिया विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत कई अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं से संबद्ध किया जाएगा।
मतदाताओं में संदेश देने की कोशिश
योजना के जरिए मदरसों में मुख्यधारा की शिक्षा भी उपलब्ध कराए जाने की बात है। भाजपा का मानना है कि पहले उस्ताद और इसके बाद नई मंजिल योजना शुरू कर अल्पसंख्यक मतदाताओं में यह संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि मोदी सरकार अपने ‘एक हाथ में कंप्यूटर और दूसरे में कुरान’ के वादे को पूरा करने में जुटी है।
मालूम हो कि मंत्रालय ने मुस्लिम कारीगरों के हुनर को विकसित करने और इन्हें सहेजने के लिए इसी महीने उस्ताद योजना की शुरुआत की है। दरअसल बिहार के हर चुनाव में राजद के पक्ष में एकजुट होने वाले माय (मुस्लिम और यादव) समीकरण से भाजपा नेतृत्व चिंतित है।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर चुनाव से पहले राजद और जदयू के बीच गठबंधन हुआ तो यह समीकरण और मजबूत हो जाएगा। चुनाव से पहले ही अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मुसलमानों को सीधे प्रभावित करने वाली नई मंजिल योजना शुरू करने की रणनीति बनाई है।