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‘सीबीआई को स्वतंत्र बताना सबसे बड़ा झूठ’
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
Updated Sun, 12 May 2013 12:39 AM IST
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सीबीआई जांच में राजनीतिक दखल का खुलासा कर केंद्र सरकार और उसके मंत्रियों की नींद उड़ाने वाले केंद्रीय एजेंसी के निदेशक रंजीत सिन्हा के मुताबिक ‘केंद्रीय एजेंसी को स्वतंत्र कहना सबसे बड़ा झूठ’ है।
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उनका कहना है कि इसमें कोई संशय नहीं होना चाहिए कि सीबीआई सरकारी तंत्र की गिरफ्त में है। सिन्हा सीबीआई के पहले ऐसे निदेशक हैं जिन्होंने इतनी बेबाकी से इस सच को स्वीकारा है।
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राजनीतिक दलों द्वारा सीबीआई के दुरुपयोग और सुप्रीम कोर्ट के ‘पिंजरे में बंद तोता’ जैसी टिप्पणियों से आगे जाकर सिन्हा ने जांच एजेंसी की स्वतंत्रता की असलियत खुद ही बयान कर दी है।
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हकीकत को कबूलने के साथ सीबीआई प्रमुख ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अब वह जांच एजेंसी की स्वायत्तता के लिए कदम उठा सकेंगे।
केंद्र के दो कद्दावर कैबिनेट मंत्रियों की छुट्टी का अहम कारण माने जा रहे एजेंसी निदेशक सिन्हा के हलफनामे ने सुप्रीम कोर्ट में कोल ब्लॉक आवंटन में चल रही जांच में सरकार के हस्तक्षेप की कलई खोली।
इसके बाद ही अदालत ने जांच रिपोर्ट किसी को न दिखाने का आदेश जारी किया।
आजादी के खतरे
वैसे सिन्हा की मानें तो सीबीआई को पूरी तरह से खुला छोड़ना भी खतरे से खाली नहीं है। ‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में रंजीत सिन्हा ने कहा कि भले ही वह सीबीआई को पूरी तरह स्वतंत्र और स्वायत्त बनाने की कोशिश में हैं। लेकिन एजेंसी को पूरी ताकत देने के पीछे भी कई खतरे छुपे हैं।
सिन्हा ने अंदेशा जताया कि सीबीआई के लोग पूर्ण स्वतंत्रता मिलने पर दुरुपयोग शुरू कर देंगे। इस खतरे को दूर करने के लिए सिन्हा ने अपने उच्च अधिकारियों से उपाय सुझाने को कहा है।
सीबीआई इन उपायों को मंत्रियों के समूह (जीओएम) के सामने रखेगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एजेंसी को स्वायत्त बनाने के लिए सीबीआई एक्ट में संशोधन के लिए इस जीओएम का गठन किया है।
हलफनामे पर नहीं थी दुविधा
सिन्हा ने बताया कि कोलगेट प्रगति रिपोर्ट में कानून मंत्री, पीएमओ व कोयला मंत्रालय के अधिकारियों को दिखाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हलफनामा दाखिल करने को लेकर उनके मन में कोई दुविधा नहीं थी।
उन्होंने ने पहली बार में यह तय कर लिया था कि उन्हें अदालत को वही बताना है जो हुआ है। सिन्हा के मुताबिक उन्हें दिखने लगा था कि उनका यह फैसला सीबीआई के चाल चरित्र में बदलाव का कारण बनने जा रहा है।
सिन्हा को इस बात का कोई मलाल नहीं है कि सर्वोच्च अदालत ने एजेंसी के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। सीबीआई के सरकारी दुरुपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का वह आदर और समर्थन करते हैं।
आया सुनहरा पल
निदेशक ने बताया कि उन्होंने अपने पूरे कैरियर में राज्यों और केंद्र सरकार की दखलंदाजी देखी है। अब देश की सर्वोच्च अदालत का सबसे बड़ी जांच एजेंसी को आजाद करने का आदेश उनके कैरियर का सुनहरा पल है। सिन्हा को सरकार से सीबीआई की स्वायत्तता के संबंध में पहल की कोई उम्मीद नहीं थी।
उन्होंने कहा कि यह काम अदालत के जरिए ही होना था। यह जरूर है कि मेरी ओर से दाखिल किया गया हलफनामा इसका कारण बन गया।
बदलाव का इंतजार
सिन्हा उस दिन का बेताबी से इंतजार कर रहे हैं जब 2010 से धूल खा रहा सीबीआई एक्ट कड़े संशोधनों के साथ कानून की शक्ल लेगा। इस प्रावधान में एजेंसी को स्वायत्त बनाने के कई बड़े फैसले लिए गए हैं।
सिन्हा ने बताया कि वह सुप्रीम कोर्ट से उस आदेश को बदलने की अपील करेंगे जिसमें स्टेटस रिपोर्ट को कानून अधिकारियों और वकीलों को भी दिखाने से मना किया गया है।
सीबीआई निदेशक के मुताबिक कानूनी सलाह लिए बिना अदालत को दी जाने वाली स्टेटस रिपोर्ट तैयार करना नई चुनौती होगी।