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बड़ा खुलासा! 'यूपी में दरोगा की पोस्टिंग के 7 लाख, प्रमोशन के 20'

Tue, 09 Jun 2015 04:11 AM IST
Updated Tue, 09 Jun 2015 04:11 AM IST
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big reveal about sub inspector posting and promotion

सर, क्या दरोगा की पोस्टिंग का रेट सात लाख रुपया फिक्स कर दूं...? यह एसएमएस है जालसाज सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल का एक तत्कालीन डीजीपी के नाम। अधिकारी ने भी जवाब एसएमएस से ही दिया, हां शैलेंद्र फिक्स कर दो। मतलब साफ है। बोली लगाकर दरोगाओं की पोस्टिंग नीलाम की जा रही थी।

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पैसे के लालच में बेईमान हो जाने वाला यह अकेला अधिकारी नहीं है। इससे पहले के एक अन्य डीजीपी के साथ जालसाज शैलेंद्र की एसएमएस के जरिए बातचीत देखिए। सर, डीपीसी के लिए दरोगा चक्कर लगा रहे हैं, क्या लेना है? जवाब मिला, एक का 20 लाख रुपया। इन दो एसएमएस से पता चलता है कि पुलिस में पोस्टिंग से लेकर प्रमोशन तक में किस तरह खुलकर पैसे का खेल चलता है?
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फिलहाल रिटायर्ड हो चुके इन दोनों अधिकारियों पर आगरा पुलिस शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि शैलेंद्र अग्रवाल की जालसाजी में इनकी भूमिका मालूम करने के लिए जांच शुरू हो चुकी है। इनके खिलाफ सुबूत जुटाने के लिए सीबीआई की तकनीकी शाखा की मदद ली गई। दरअसल, करोड़ों की जालसाजी में एक मई से जिला जेल में बंद सपा नेता शैलेंद्र अग्रवाल के मोबाइल की कॉल डिटेल रिपोर्ट पुलिस निकाल नहीं पा रही थी।

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मलाईदार पोस्टिंग के लिए तय है रकम

big reveal about sub inspector posting and promotion

सीबीआई से जो रिपोर्ट आई, उसने पुलिस के अफसरों को चौंका दिया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने शैलेंद्र के एसएमएस भी डीकोड करके इनके संदेश उजागर कर दिए। इनमें ही दो तत्कालीन डीजीपी की पैसा वसूली का काला चिट्ठा सामने आ गया है। शैलेंद्र को पहली बार रिमांड पर लिया गया तो उसने यह तो कुबूल किया कि उसके अफसरों से रिश्ते हैं, लेकिन किसी का नाम नहीं बताया था।

पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अब उसे फिर से रिमांड पर लेकर उसके सामने कॉल डिटेल और एसएमएस का ब्योरा रखकर पूछताछ की जाएगी। खास तौर से पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के साथ उसकी बातचीत और एसएमएस के बारे में सवाल किए जाएंगे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दरोगाओं को मलाईदार पोस्टिंग के लिए सात लाख तय किए गए थे।

बता दें, इस जालसाज की जालसाजी तो बहुत लंबे समय से चल रही थी, लेकिन कोई उसके खिलाफ केस दर्ज कराने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। जब एक दारोगा की पत्नी ने रिपोर्ट दर्ज करा दी, फिर तो लाइन लग गई। अब तक 27 केस लिखे जा चुके हैं। इनमें शैलेंद्र के परिवारीजन और रिश्तेदार भी मुल्जिम बने हैं।

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