बड़ा फैसला: दहेज मांगने वालों का निकाह नहीं पढ़ाएंगे
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दहेज प्रथा पर रोक लगाने के लिए बरेलवी मरकज दरगाह आला हजरत के उलमा दहेज मांगने वालों का निकाह नहीं पढ़ाएंगे। उलमा ने यह भी फैसला किया है कि खड़े होकर खाना खिलाने वालों का बहिष्कार किया जाएगा और उनका भी निकाह नहीं पढ़ाया जाएगा।
जमात रजा मुस्तफा के शहर काजी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना असजद रजा खां कादरी ने बताया कि दहेज मांगने और कार्यक्रमों में खड़े होकर खाना खिलाने वालों के खिलाफ आंदोलन की शुरुआत कसबा ठिरिया से शुरू कर दी है।
तय किया गया है कि देश में जहां-जहां ये कुरीतियां होंगी वहां लोगों को शरीयत के हवाले से समझाया जाएगा। इसके बाद भी न मानने वालों के यहां कोई भी आलिमे दीन निकाह नहीं पढ़ाएगा।
दहेज मांगना नाजायज
लगातार बढ़ रही दहेज की मांग के चलते समाज के एक बड़े तबके में लड़कियों की शादी नहीं हो पा रही है। दहेज मांगने को शरीयत-ए-इस्लामिया ने नाजायज करार दिया है। वहीं शादी-ब्याह और दूसरे कार्यक्रमों में खड़े होकर या चलते-फिरते खाना खाने को भी इस्लामी शरीयत के खिलाफ माना गया है।
दहेज मांगने पर रोक लगाने में हमारी नीयत खैर की है और लोगों को शरीयत पर अमल के लिए पाबंद बनाना है ताकि फिजूलखर्ची तथा गैर शरई तरीकों पर रोक लगे।
- मौलाना असजद रजा खां कादरी, शहर काजी एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष, जमात रजा मुस्तफा
पैगंबरे इस्लाम ने निकाह, शादी, वलीमा, दहेज या खाना खाने का जो तरीका बताया है, उसी को अपनाना चाहिए। इसके खिलाफ चलेंगे तो खुदा और रसूल नाराज होंगे।
- मुफ्ती शुएब रजा कादरी, उपाध्यक्ष मरकजी दारुल इफ्ता