क्या अडाणी के खिलाफ जांच कराएंगे CBI चीफ?
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सीबीआई के नए निदेशक अनिल कुमार सिन्हा के सामने राजनीतिक लिहाज से संवेदनशील दो अहम चुनौतियां हैं।
पहला मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास माने जाने वाले उद्योगपति गौतम अडाणी की तीन कंपनियों के खिलाफ ओवर इनवायसिंग का है, जबकि दूसरा, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को सोहराबुद्दीन व तुलसी प्रजापति फर्जी एनकाउंटर मामले में सीबीआई की क्लीन चिट से जुड़ा है।
सिन्हा की तीसरी चुनौती है कोयला ब्लॉक और 2जी घोटाले में सीबीआई के दो पूर्व निदेशकों एपी सिंह और रंजीत सिन्हा की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच एजेंसी की साख को बहाल करना। इस हालात में निदेशक का पद ग्रहण करने के बाद सिन्हा ने कहा है कि उनके लिए उनका काम ही हर सवाल का जवाब देगा।
अनिल सिन्हा के सामने बड़ी चुनौती
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने मोदी सरकार के गठन से पहले 16 मई को अडाणी की तीन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजा था। इस नोटिस में अडाणी की बिजली कंपनी के लिए चीन और दक्षिण कोरिया से आयात किए गए उपकरणों में करीब 6000 करोड़ की ओवर इनवायसिंग पर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
इस आधार पर सीबीआई ने जुलाई के पहले हफ्ते में एक प्राथमिक जांच (पीई) दर्ज कर ली। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के कार्यकाल में पीई तो दर्ज की गई, लेकिन उस पर अब तक कोई खास कार्रवाई नहीं हुई है।
डीआरआई ने यूपीए सरकार के दौरान ही मामले की जांच शुरू की थी, जिसमें कई गंभीर खामियां थीं। गौरतलब है कि जिस काले धन पर सरकार और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहा है ओवर इनवायसिंग उस धन का सबसे कारगर और प्रचलित जरिया है।
उधर, सीबीआई इशरत, सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति फर्जी एनकाउंटर मामले में शाह को क्लीन चिट दे चुकी है। शोहराबुद्दीन के परिवार ने सीबीआई के फैसले को अदालत में चुनौती दी है। अगर अदालत इस बारे में सवाल खड़ा करता है तो सीबीआई का जवाब अहम साबित होगा।