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भोपाल त्रासदी: आज भी नसों में रिस रहा है जहर

Wed, 03 Dec 2014 12:58 PM IST
Updated Wed, 03 Dec 2014 12:58 PM IST
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Bhopal Gas Tragedy - 30th Anniversary of Bhopal Disaster

हर तरफ बदहवासी का आलम। जो जहां था, सुरक्षित ठिकाने तलाश रहा था। हालात यह थे कि जाएं तो जाएं कहां। कोई खून की उल्टियां किए जा रहा था तो कोई बुरी तरह से खांस रहा था। किसी को कुछ भी नहीं मालूम था कि आखिर माहौल इतना बदला बदला सा क्यों था।

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कोई नहीं जानता था कि अगली सुबह रात से भी भयानक काली होने वाली थी। जब तक लोग समझ पाते कि हवा में कोई जहरीली गैस घुल चुकी है, तब तक सैकड़ों लोग दम तोड़ चुके थे। सूरज की किरणों के साथ जब मातमी सबेरे ने दस्तक दी तो शहर उजाड़ और वीरान हो चुका था।
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घरों, गलियारों, चौराहों, स्टेशनों पर लाशें ही लाशें दिखाई दे रही थीं। यह खौफनाक मंजर था आज से तीस साल पहले भोपाल का, जिसे शहर निवासी बयासी वर्षीय कृपाशंकर शर्मा आज भी याद करके सिहर उठते हैं।
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वह कहते हैं, ‘पूरी जिंदगी बीत गई, मगर मौत का ऐसा तांडव नहीं देखा। बहुत से तो ऐसे थे, जो रात में सोए तो उनकी फिर कभी सुबह ही नहीं हुई। सांस और पेट फूलने की वजह से परिवार के लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।’

इस जहर ने बहुत सी जिंदगियां लील लीं। कुछ विकलांगता के शिकार हो गए। जो इन सबसे बचे तो उन्हें परिजनों के बिछड़ने की जीवन भर की टीस रह गई।

आरोपियों की सजा की आस रही अधूरी

Bhopal Gas Tragedy - 30th Anniversary of Bhopal Disaster

तथ्य
-2-3 दिसंबर, 1984 को हुई यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र में मिथाइल आइसो साइनेट (मिक) का रिसाव।
-पांच लाख लोग प्रभावित। मौतों की सरकारी संख्या-2259, जबकि गैर सरकारी आंकड़ों के हिसाब से मृतकों की संख्या 16 हजार।

कैसे हुआ हादसा:
2-3 दिसंबर की रात को संयंत्र के एक टैंक में पानी का रिसाव होने की वजह से भारी दबाव पैदा हो गया, जिससे टैंक का अंदरूनी तापमान 200 डिग्री के पार पहुंच गया। इससे महज 45 मिनट में ही 30 मीट्रिक टन मिक गैस का रिसाव हो गया।

सजा की आस रही अधूरी:
संयंत्र के सीईओ वॉरने एंडरसन को इस दुर्घटना का मुख्य आरोपी बनाया गया था। एंडरसन भारत से निकलने के बाद से फिर कभी नहीं आया। बीते 29 अक्तूबर को फ्लोरिडा में 92 साल की उम्र में एंडरसन की मौत हो गई।

उचित मुआवजा नहीं:
त्रासदी में पीड़ितों की गलत संख्या, उचित मुआवजा, पुनर्वास और पर्यावरण संबंधी मुद्दे आज भी जस के तस ही हैं। मोदी सरकार ने इस पर गंभीरता दिखाई है।

और त्रासदियां-
चेरिनोबिल हादसा: 26 अप्रैल, 1986 को यूक्रेन के नाभिकीय रिएक्टर और इटली के सेवेसो में 10 जुलाई, 1986 को कीटनाशक संयंत्र में दूषित भाप के रिसाव से हजारों लोग प्रभावित हुए।

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