फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   bharat bandh two day strike begins leader killed

हड़ताल का जबर्दस्त असर, तोड़फोड और आगजनी

Wed, 20 Feb 2013 09:54 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 20 Feb 2013 09:54 PM IST
विज्ञापन
bharat bandh two day strike begins leader killed

यूपीए सरकार की जन और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ देश की 11 बड़ी ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर बुधवार को दो दिवसीय हड़ताल की शुरुआत हुई। उत्तर भारत समेत केरल, त्रिपुरा और बिहार में इसका जबर्दस्त असर दिखा।

विज्ञापन


यूनियनों ने हड़ताल के पहले दिन मिले जनसमर्थन को अभूतपूर्व बताते हुए उम्मीद की कि सरकार अब शायद नींद से जागेगी। वहीं हरियाणा और नोएडा में इस बंद ने हिंसक रूप धारण किया। हरियाणा में हड़ताल में शामिल एक यूनियन लीडर की मौत हो गई, वहीं नोएडा के फेज-2 में कर्मचारी फैक्ट्री मालिकों से भिड़ गए।
विज्ञापन


इसके बाद हुई उग्र हिंसा में कर्मचारियों ने सैकड़ों फैक्ट्रियों ने तोड़फोड़ की। आधा दर्जन फैक्ट्रियों और करीब दो दर्जन वाहनों में आग लगा लगा दी। जमकर लूटपाट भी हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


सेक्टर-82 से ग्रेटर नोएडा के एंट्री पाइंट तक कर्मचारियों ने कारों, बसों और फायर इंजिन को आग के हवाले किया। उधर ओडिशा और कर्नाटक से भी हिंसा की खबरें हैं। तमाम राज्यों की राजधानियों में बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों तथा बसों-टैक्सियों के बंद में शामिल होने से आम जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नोएडा में फैक्ट्री मालिकों के रवैये को लेकर औद्योगिक सेक्टरों में मजदूरों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने जमकर तांडव किया। उपद्रव के दौरान पुलिस बल मौके से नदारद दिखा। बाद में मजदूरों की पुलिस से झड़प हुई और उग्र भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग से लेकर रबड़ की गोलियां तक दागीं। इस बीच फायर बिग्रेड की एक गाड़ी में आग लगा दी गई।

आधा दर्जन पुलिस वाहनों में भी तोड़फोड़ हुई। इस मामले में देर शाम तक 32 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था। उत्तर प्रदेश सरकार ने सभी प्रभावित लोगों के मुकदमे दर्ज करने के आदेश देने के साथ ही मौके पर अतिरिक्त सुरक्षा बल भी तैनात कर दिया है। सरकार के आदेश पर मेरठ मंडलायुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने जांच अपर आयुक्त डा. अजय शंकर पांडेय को सौंप दी है।

दूसरी तरफ हरियाणा के अंबाला में सरकारी बस को डिपो से बाहर निकालने से रोकने को लेकर एक रोडवेज कर्मचारी नेता, 55 वर्षीय नरेंद्र सिंह बस की चपेट में आ गया और उसकी मौत हो गई। घटना चार बजे तड़के की है। इसके बाद बिफरे यूनियन नेताओं व सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। गुस्साए मुलाजिमों ने डीसीपी शहरी तथा एसएचओ की गाड़ियों में तोड़फोड़ की और गाड़ियों को पलट दिया।

गृह मंत्रालय की हिंसा पर नजर
हड़ताल के दौरान गृह मंत्रालय सभी राज्यों के मुख्य सचिव से संपर्क में है। केंद्र ने राज्यों को सतर्क रहने का निर्देश दिया है। नोएडा में हिंसा और आगजनी के बाद गृहसचिव आरके सिंह ने यूपी के मुख्य सचिव से फोन पर बात।

उधर अंबाला में यूनियन नेता के मारे जाने की रिपोर्ट भी मंत्रालय ने तलब की है। हड़ताल के चलते बुधवार को नक्सल प्रभावित राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की गृह मंत्रालय में होने वाली अहम बैठक टाल दी गई। संसद सत्र की शुरुआत को देखते हुए भी देशभर में एलर्ट रहने की हिदायत के साथ सभी महानिदेशकों को अपने राज्य में ही रहने का निर्देश दिया गया। अब यह बैठक अगले हफ्ते होगी।

यूपी की बसों में कंडक्टर नहीं
उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन में अजीबोगरीब स्थिति नजर आई। जहां राज्यों की सरकारी बसों के कंडक्टरों ने हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया, वहीं बसें चलती रहीं। ऐसे में पूरे समय यह रहस्य बना रहा कि जब बसों में कंडक्टर नहीं थे तो यात्रियों से किराया किस प्रकार वसूला गया। राज्य में ऑटो रिक्शा सड़कों से दूर रहे। कम से कम शाम तक तो यही स्थिति थी।

परेशान पर सकुशल रही दिल्ली

राजधानी के सार्वजनिक बैंकों, आयकर विभाग, बीमा और औद्योगिक क्षेत्रों में हड़ताल का असर दिखा। लोगों को ज्यादा दिक्कत सार्वजनिक बैंक बंद होने से रही। दोपहर बाद एटीएम पर लंबी लाइनें दिखी। बड़े बाजार खुले तो, पर कारोबार नहीं हुआ।

ऑटो-टैक्सी की हड़ताल के चलते स्टेशन और आईएसबीटी से अपनी मंजिल को जाने वालों को खासी दिक्कतें हुईं। राजधानी में कई जगह रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनों की शुरुआत आईटीओ से हुई। कहीं से हिंसा की खबर नहीं है। वैसे प्रदर्शनकारियों ने तीस डीटीसी बसों की हवा निकाल दी। पुलिस ने कुल 18 लोगों को हिरासत में लिया।

यात्री होते रहे हलाकान

बंद ने सबसे ज्यादा यात्रियों को परेशान किया। चाहे वे रोजमर्रा के काम से बाहर निकलने वाले यात्री रहे हों या फिर दूसरे शहरों से रेलवे स्टेशनों और बस स्टैंडों पर पहुंचे लोग। देश के अधिकांश हिस्सों में ऑटो रिक्शा हड़ताल में शामिल रहे। कुछ जगहों पर सरकारी बसें जरूर चल रही थीं, लेकिन उनकी सेवाएं नियमित नहीं थीं। इसके अतिरिक्त बसों में ‘ओवर लोडिंग’ जैसे स्थिति ने भी लोगों को हलाकान किया।

मारुति, हीरो ने घोषित की छुट्टी
कार बाजार की लीडर मारुति सुजुकी इंडिया और दोपहिया वाहनों की प्रमुख हीरो मोटोकॉर्प ने कर्मचारी यूनियनों द्वारा की जा रही हड़ताल के उग्र रूप को देखते हुए अपनी गुड़गांव-मानेसर इकाइयों में बुधवार की छुट्टी घोषित की है। इन इकाइयों के कर्मचारी भी हड़ताल के समर्थन में हैं। हड़ताल की इस छुट्टी के बदले कर्मचारी रविवार को काम करेंगे। मारुति उद्योग कामगार यूनियन ने मैनेजमेंट के साथ बैठक में यह रास्ता निकाला। यूनियन के महासचिव कुलदीप झांगू ने यह जानकारी दी है।

बैंकों में हुआ कामकाज प्रभावित
सरकारी बैंकों में चेक क्लीयरेंस और पैसा जमा करना-निकालना जैसे छोटे मगर बेहद जरूरी काम हड़ताल के कारण बुधवार को बुरी तरह प्रभावित हुए। इन बैंकों ने हड़ताल के कारण अवकाश जैसी स्थिति की सूचना ग्राहकों को नहीं दी थी।

बैंक कर्मियों का प्रमुख संगठन युनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनिसंय हड़ताल का आह्वान करने वाले प्रमुख संगठनों में से है। हालांकि आईसीआईसीआई और एचडीएफसी जैसे निजी बैंकों में काम सामान्य ढंग से हुआ। एलआईसी और न्यू इंडिया एश्योरेंस समेत निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों ने भी हड़ताल में हिस्सा लिया। 26 सरकारी बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं।

ममता और ट्रेड यूनियनों में ठनी
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मजदूर संगठन आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ ममता ने चुनाव आयोग से कहा कि जिन राजनीतिक दलों के मजदूर संगठन हड़ताल का हिस्सा हैं उन्हें चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर देना चाहिए।

वहीं मजदूर संगठनों ने ममता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है। ममता ने कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में राज्य में हड़ताल को ‘गैरकानूनी’ करार दिया है। संगठनों का कहना है कि अदालत ने सिर्फ इतना कहा था कि हड़ताल में शामिल होने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता। लेकिन ममता इसकी आड़ में हड़ताल पर पूरी तरह रोक नहीं लगा सकतीं।

कहां कितना असर
- पूर्वी भारत
सबसे ज्यादा असर बिहार और त्रिपुरा में रहा। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में भी बंद का असर दिखा। बिहार में बंद समर्थक दुकानों को बंद कराते नजर आए। पूर्व में खास तौर बैंकिंग सेक्टर प्रभावित रहा, जहां सरकारी कर्मचारी केंद्र की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ हड़ताल के समर्थन में दिखे। त्रिपुरा में स्कूल, कॉलेज, बैंक और वित्तीय संस्थान पूरी तरह बंद रहे। निजी-सार्वजनिक परिवहन भी नहीं चले। जबकि कोलकाता में सरकारी बसें और ट्राम चलीं।

- पश्चिमी भारत
महाराष्ट्र, गोवा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में वित्तीय कारोबार करीब-करीब ठप रहा। बैंक, वित्तीय कंपनियां, पोस्ट ऑफिस और औद्योगिक संस्थान बंद रहे। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बैंकिंग और बीमा सेक्टर शत-प्रतिशत बंद था। रिजर्व बैंक का कामकाज काफी हद तक सुचारू रहा। लेकिन उसके ग्रेड-3 और ग्रेड-4 कर्मचारी हड़ताल पर रहे। गुजरात में राज्य बस सेवा कर्मचारियों ने भी 24 घंटे की हड़ताल का आह्वान किया। जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित रही।

- दक्षिणी भारत
वाम दलों के प्रभाव वाले केरल में हड़ताल का सबसे ज्यादा असर रहा। जबकि कर्नाटक-तमिलनाडु में हड़ताल प्रभावी नहीं रही। केरल में परिवहन और बैंकिंग व्यवस्था चरमराई रही। बसें-टैक्सियां नहीं चलीं। दुकानें बंद रहीं। हालांकि हिंसा नहीं हुई। कर्नाटक में बसों पर पथराव की घटनाएं हुईं। बंगलूरू में शिक्षण संस्थाएं बंद रहीं। इसके बावजूद दक्षिण भारत में हड़ताल का ज्यादा असर नहीं रहा। केंद्र सरकार के दफ्तरों में उपस्थिति आम दिनों की तरह ही सामान्य रही।


और महानगरों का हाल

- दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जहां हड़ताल से प्रभावित नजर आए वहीं चेन्नई में इसका विशेष असर नहीं दिखा। चेन्नई में ज्यादातर दुकानें खुली थीं और ऑटो रिक्शा सामान्य दिनों की तरह चले। मुंबई में बैंकिंग और वित्त सेक्टर पूरी तरह बंद रहा। जबकि कोलकाता में ममता बनर्जी के हड़ताल विरोधी आह्वान का खास असर नहीं दिखा। लोग घरों में रहे। विमान और ट्रेन सेवाएं बहाल रहीं। जयपुर, इंदौर, हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में भी हड़ताल का प्रभाव नजर आया।

- 11 ट्रेड यूनियनों ने किया है दो दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान।
- बैंकों में 40 लाख चेक अटके, 25 हजार करोड़ रुपए का लेन-देन प्रभावित।
- हड़ताल में में 26 हजार करोड़ रुपए तक के आर्थिक नुकसान की आशंका।
- 100 से ज्यादा नोएडा की फैक्ट्रियों में हुई तोड़फोड़।
- 2 दर्जन से ज्यादा वाहनों को किया आग के हवाले।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed