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भागवत बोले, 'धर्मांतरण अच्छा ही नहीं जरूरी भी'

Mon, 22 Dec 2014 12:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 22 Dec 2014 12:17 AM IST
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Bhagwat on conversion issue.

धर्मांतरण के मसले पर भले ही विपक्षी पार्टियां संसद से सड़क तक भाजपा को घेर रही हैं, लेकिन संघ इस मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।

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रविवार को यहां आयोजित वनवासी रक्षा परिवार कुंभ-2014 में संघ प्रमुख मोहन भागवत सीधे तौर पर तो नहीं, लेकिन इशारों-इशारों में बहुत कुछ बोल गए। उन्होंने कहा कि यह काम अच्छा ही नहीं, आवश्यक है। सज्जनों को अच्छा लगता है और इसलिए इसे करना हमारा कर्तव्य है। इससे किसी को परेशानी है तो हमें उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि हम ‘टोलरेंस’ नहीं ‘एक्सेप्टेंस’ वाले लोग हैं। अपने घर अगर वो वापस आ जाएं तो वे भूले नहीं है। हमें उनसे नाता जोड़ना चाहिए। लोभ, लालच, जबरदस्ती के चंगुल में फंस गए हैं। आज समाज उनके साथ है। इस बात का विश्वास उन्हें दिलाने की जरूरत है।
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मोहन भागवत ने अपने भाषण में धर्मांतरण शब्द का जिक्र नहीं किया, लेकिन विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल और स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी महाराज के उन कथनों का पूरा समर्थन किया, जिसमें दोनों ने भागवत के उद्बोधन के पहले कहा था कि हम धर्मांतरण नहीं घर वापसी करा रहे हैं और इससे किसी के पेट में दर्द होता है तो वह कानून बनाने में सरकार का समर्थन करे। सिर्फ हिंदू की गतिविधियों पर आपत्ति कहीं से उचित नहीं है।

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