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आपकी जिंदगी को पल भर में बदल देंगे गीता के ये उपाय

Fri, 10 Apr 2015 03:09 PM IST
Updated Fri, 10 Apr 2015 03:09 PM IST
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bhagvat geeta lessons to improve life daily life
जब देखो तब डरते ही रहते हो। काहे इतना डरते हो। सबसे बड़ा डर क्या है। मौत। लेकिन मौत से डरने की जरूरत नहीं है। मौत अस्थायी चीजों के साथ होने वाली एक सतत प्रक्रिया है। तुम साधारण मनुष्य होकर मौत से डरते हो...उस सिपाही से पूछो जो रोज सीमा पर खड़ा होकर मौत को चुनौती देता है। वो मरने से नहीं डरता क्योंकि वो जानता है कि उसका शरीर अस्थायी है लेकिन देश की रक्षा का जज्बा स्थायी है। वो जज्बा कभी नहीं मरता।
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एक बार सोचो कि अगर तुम्हारे दिमाग और दिल से मौत का डर निकल जाए तो जिंदगी कितनी सुंदर और मजेदार हो जाएगी।

इतना शक भी न करो....

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जब देखो दूसरों पर शक करना तुम्हारा शगल बन गया लगता है। टीवी सीरियल कम देखा करो और चीजों को दूसरे नजर‌िए से देखना सीखो।

भगवत गीता में लिखा है कि अपने आप का आकलन करो और देखो ‌कि तुम कितने बड़े शंकालु हो। सब पर शक करते हो। बेवजह शक करते हो...दोस्तों पर, दफ्तर के साथियों पर और यहां तक कि अपने परिजनों को भी शक क‌ी निगाह से देखते हो। इतना शक करना सही नहीं। ये विवाद और परेशानी का सबब है। जरूरी नहीं कि सारी दुनिया तुम्हारा बुरा करने पर तुली है। भगवान कृष्ण कहते हैं कि एक शंकालु व्यक्ति को इस दुनिया और दूसरी किसी दुनिया में शांति नहीं मिलती।

एक बार शंका को मन से निकाल कर देखो। अपने दोस्तों पर खुले मन से विश्वास करके देखो। इस बात को सोचो कि तुम्हारे परिजन तुम्हारा भला चाहते हैं। विश्वास करोगे तो विश्वास पाओगे और शक करोगे तो फल वैसा ही मिलेगा क्योंकि व्यक्ति जैसा लगातार सोच रहा होता है वैसा फलित होने लगता है।
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इच्छाओं का कोई अंत नहीं

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आज छोकरी चाहिए कल नौकरी चाहिए, परसों कार...जरा थम जाओ और सांस ले लो। फिल्म नहीं है जो ढाई घंटे में सब कुछ मिल जाएगा।
भगवत गीता में लिखा है कि सब कुछ एक साथ सोच लोगे तो फलित होने में लगने वाला समय तुम्हें बहुत परेशान कर देगा। हर चीज का समय होता है। हर समय दिमाग में कुछ न कुछ पाने की इच्छा रखना और इच्छाओं की लंबी चौड़ी लिस्ट बना लेना सही नहीं।

कर्म करने के बाद जब तुम्हारे पास पैसा हो तो वो चीज खरीद लो जो तुम्हें जरूरत की लग रही हो। लेकिन सालों पहले से उस चीज को पाने की इच्छा बना लेने से मन में इच्छाओं की भीड़ लग जाती है। इससे मन अशांत होता है और सोचने विचारने की ताकत कम होती जाती है।
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फल की चिंता किए बिना काम करो

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ये करूंगा तो वो मिलेगा.वो करूंगा तो ऐसा होगा..ये चिंता दूसरों पर छोड़ दो। कम से कम फल के पकने तक फल की चिंता मत करो।

अगर तुम किसी काम के सफल और असफल होने की चिंता करते रहोगे तो काम कब करोगे। तुम नया काम करो, बिना ये सोचे कि ये सफल होगा या नहीं। हम अपनी जिंदगी में कई बेमिसाल काम केवल इसलिए छोड़ देते हैं क्योंकि हमारे मन में उसके सफल होने की गारंटी नहीं होती।

सोचो अगर स्टीव जाब्स के मन में ये डर होता तो क्या वो कंप्यूटर के क्षेत्र में नए नए परीक्षण कर पाते, कभी नहीं। स्टीव ने कभी नहीं सोचा कि मैं फेल हो गया तो क्या होगा।  तो तुम फेल होने से क्यों डरते हो। जितनी बार फेल होगे उतना ज्यादा अनुभव तुम्हारे पास एकत्र होगा। जो व्यक्ति जिंदगी में संभाव‌ित सफलता और असफलता से अप्रभावित रहता है वहीं कुछ नया करने का श्रेय ले पाता है।

जिम्मेदारी से दूर मत भागो

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ओह इतना काम मैं नहीं कर पाऊंगा। इतनी जिम्मेदारी, मैं कैसे उठा पाउंगा। ये सोचना ही काम से दूर भागने की तरह है।

काम से दूर मत भागो, जितना हो सके...उतना तो करो ही। इस भौतिक संसार में हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी उठानी है। आज कोई तुम्हारा काम कर देगा, कल भी कर देगा, लेकिन तीसरे दिन तो तुम्हें खुद ही करना होगा।  दो दिन जिसने तुम्हारा काम किया, उसका फल उसे ही मिलेगा, तुम्हें नहीं। भगवान कृष्ण कहते हैं कि कर्म अपने ही हाथ से फलित होते हैं इसलिए कर्म करो।

अगर तुम ये सोचते हो कि काम करने से थक जाओगे या घट जाओगे तो ये समझ लो कि काम न करने से तुम्हारा तन मन और धन सबको नुकसान होगा और आत्मा चैतन्य नहीं रहेगी। दुनिया एक दिन आगे निकल जाएगी और तुम मृतावस्था में पड़े रहोगे। क्या ये तुम्हें मजूंर है।

स्वार्थ सेहत के लिए अच्छा नहीं

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स्वार्थियों की वैसे भी दुनिया में कमी नहीं। तुम कुछ अलग करो तो नाम होगा। दूसरों की मदद करके देखो...सुख होगा और नाम भी।

भगवत गीता कहती है कि मेरा फायदा मेरा पैसा, मेरे अपने, यही सोचकर सब परेशान हुए जा रहे हैं। क्या तुम सांस भी सोचकर लेते हो। अगर आत्मा स्वार्थी हो जाए तो वो तुम्हारा शरीर छोड़कर किसी दूसरे और अच्छे शरीर में समा जाएगी। इसलिए स्वार्थ छोड़ों और मन को बड़ा करके देखो। दूसरों की मदद करके देखो, तुम्हारी आत्मा सुखी होगी और सुखी आत्मा से बढ़कर संसार में कुछ नहीं।

तुम आज किसी की मदद करके भूल सकते हो लेकिन तुम्हारी मदद पाने वाला तुम्हे कभी नहीं भूलेगा। वो हमेशा तुम्हारे लिए ऋणी रहेगा। यही तो संसार का नियम है।  दोस्ती के नाम पर अच्छे काम करो...जरूरतमंदों की मदद करने के बाद एक अजीब सा सुख महसूस तो किया होगा तुमने।

बात बात पर रोना छोड़ो

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जरा जरा सी बात पर होपलैस होना सही नहीं। रोतड़ू लोगों की संसार में कोई पूछ नहीं।

दुख आया तो बेदम हो गए और खुशी आई तो संभाली नहीं गई। ये रवैया एक कमजोर इंसान को और कमजोर बनाता है। दुख और सुख में बैलेंस बनाना सीखो। दुख आए तो निपटने के उपाय करो और खुशी आए तो बनाए रखने के सिद्धान्त सीखो।  जो व्यक्ति सुख और दुख  को समान रूप से लेता है वो इन दोनों के साथ न्याय करता है।

तुमने देखा होगा...सामने से आती गाड़ी देखकर कुछ लोग हाथ पैर छोड़ देते हैं। वो बचने के उपाय खोजने की बजाय गाड़ी के सामने खड़े रहते हैं। उन्हें बचाने के लिए भगवान नहीं आएगा। भगवान ने दिमाग दिया है जिसे इस्तेमाल करके खुद बचना होगा। इसलिए हर परिस्थिति में धैर्य रखो।

इतना गुस्सा न करो....जस्ट चिल

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आप हर बात पर गुस्सा करते हो। आप का तर्क है कि दूसरों की गलती पर गुस्सा करते हो। लेकिन गुस्सा अपने आप में एक गलती है। आप रोज रोज वही गलती दोहरा रहे हो। भगवान कृष्ण कहते हैं कि क्रोध से व्यक्ति की तर्क करने की क्षमता खत्म हो जाती है। वो अच्छे बुरे की पहचान खो बैठता है। अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ हो रहा है तो ये गुस्सा ही असली वजह है।

अगर कहीं मनमुटाव है तो शांत मन से सोचो...हर समस्या का हल निकलेगा। किसी की गलती पर एकाएक बौरा उठने की बजाय कुछ पल शांत रहो और सोचो कि तुम उसकी जगह होते तो क्या करते। दरअसल क्रोध आपको असफलता और विनाश के मुहाने पर खड़ा कर देता है और ऐसी परिस्थितियां बनाता है कि आप खुद ही छलांग लगा लो।

छोटे कदम से बड़ी सफलता नहीं मिलती

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जिस तरह शार्टकट घातक होते हैं उसी तरह छोटे और गलत रास्ते हमेशा असफलता की गली में मुड़ जाते हैं। दूरी लंबी सही लेकिन रास्ता सही होना चाहिए। अगर तुम जल्दी सफलता पाना चाहते हो तो ध्यान रखो कि वो सफलता स्थायी नहीं होगी। हर शार्टकट टैंपरेरी होता है। इसलिए सधे हुए ढंग से काम करो। किसी भी काम से टालमटोल मत करो..अगर तुमसे ज्यादा अनुभवी कोई सलाह देता है तो उसे सूत्रवाक्य की तरह उपयोग करो।

जिस तरह चोरी का माल मोरी (नाली) में जाता है उसी प्रकार बेमन से किया गया काम भी नाली में जाता है। काम को मन से करो और जितने समय में होता है उतने समय में करो....सफलता जरूर मिलेगी।
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