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AMAR UJALA IMPACT: भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने की तैयारी शुरू
ओम प्रकाश
Updated Wed, 21 Aug 2013 07:59 AM IST
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अमर उजाला’ के आरटीआई अभियान के चलते शहादत के नौवें दशक में आखिर केंद्र सरकार ने महान क्रांतिकारी भगत सिंह को अपने रिकॉर्ड में सम्मान देने की तैयारी शुरू कर दी है।
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उन्हें 23 मार्च 1931 को अंग्रेजों ने फांसी दे दी थी। आजादी के 66 साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया था।
‘अमर उजाला’ द्वारा केंद्रीय गृह मंत्रालय में डाली गई एक आरटीआई पर जवाब को लेकर देशभर में बवाल मच गया था। अप्रैल में डाली गई आरटीआई में पूछा गया था कि भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु को शहीद का दर्जा कब दिया गया। यदि नहीं तो उस पर क्या काम चल रहा है।
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इस पर नौ मई को गृह मंत्रालय का हैरान करने वाला जवाब आया। इसमें कहा गया कि इस संबंध में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। इसी जवाब को लेकर फरीदाबाद में रहने वाले शहीद-ए-आजम के वंशज (प्रपौत्र) यादवेंद्र सिंह संधू ने आंदोलन का ऐलान कर दिया।
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इसके बाद अमर उजाला ने 21 जुलाई को ‘भगत सिंह के सम्मान पर गृह मंत्रालय को दिलचस्पी नहीं’ शीर्षक से समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया।
गृह मंत्री ने शहीद परिवार को इस बारे में मिलने का समय तक नहीं दिया। इस पर भी अमर उजाला में खबर छापी गई। नतीजा यह हुआ है कि राष्ट्रीय स्तर पर यह मुद्दा उठा।
प्रधानमंत्री ने खुद इस मामले में दखल दिया। सोमवार को राज्यसभा में मुद्दा उठा और सरकार ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को लेकर रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आश्वासन दिया।
संधू ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि उन्होंने इस मुद्दे को लेकर जो संवेदनशीलता दिखाई, वह तो ठीक है, लेकिन रिकॉर्ड दुरुस्त करने की समय सीमा तय करने की जरूरत है।
उन्होंने सरकार की घोषणा के बाद आंदोलन स्थगित किया है, खत्म नहीं। अच्छा होगा कि शहीद-ए-आजम के जन्मदिन 28 सितंबर तक रिकॉर्ड ठीक कर दिया, वरना फिर से यह मुद्दा उठेगा।