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एक लड़की की शादी छह लड़कों के साथ!
अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 10 Jan 2014 12:37 PM IST
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'यदि कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ लोग जागरूक नहीं हुए और बेटियों को न बचाया गया तो समाज भी नहीं बच पाएगा। यही हाल रहा तो समाज में हर जगह द्रौपदी होंगी यानी लड़कियां इतनी कम हो जाएंगी कि एक-एक महिला के पांच-पांच पति होंगे।
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'अमर उजाला' की पहल 'बेटी ही बचाएगी' अभियान के तहत गुरुवार को किदवईनगर साउथ एक्स मॉल के पास विश्व मानव एकता परिषद ने नुक्कड़ नाटक करके यह संदेश दिया। लोगों को इस अभियान से जुडऩे के लिए भी प्रेरित किया गया।
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नाटक में दिखाया गया कि एक घर में लड़के वाले लड़की को देखने जाते हैं। लड़के का पिता लड़की के पिता से कहता है कि उनके छह लड़के हैं मगर उनकी शादी के लिए लड़कियां नही मिल रही हैं, इसलिए वह अपने सभी लड़कों की शादी उनकी एक ही लड़की से ही कराना चाहते हैं।
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यह सुनकर लड़की का पिता हतप्रभ रह जाता है और कहता है कि एक लड़की की शादी छह लड़कों से कैसे होगी। इस पर लड़के के पिता बताते हैं कि समाज में लड़कियों की कमी की वजह से ऐसा हुआ है।
लड़की के पिता कहते हैं यही हाल रहा तो कहीं ऐसा समय न आ जाए कि अल्ट्रासाउंड कराना पड़े और गर्भ में लड़का होने पर गर्भपात कराना पड़े। वह शादी से इन्कार कर देता है और लड़के का पिता अपने छह लड़कों के साथ मायूस लौट जाता है।
विश्व मानव एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रवि शर्मा डेविड ने बताया कि नाटक के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अगर अब भी हम नहीं चेते तो द्रौपदी और पांडव का इतिहास दोहराना पड़ सकता है।
उन्होंने बताया कि 'अमर उजाला' के 'बेटी ही बचाएगी' अभियान से जुड़कर वे 24 जनवरी तक चौराहों-चौराहों पर नुक्कड़ नाटक कर लोगों को कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जागरूक करेंगे।
इस नुक्कड़ नाटक में डा. रवि शर्मा डेविड, आकाश सागर, शिवम गंगोत्री, अभिषेक, आकाश, राज भारती, कमल, शिवा और निधि शामिल रहे।
'ओई माई री चुपके से मारा'
नाटक में एक किरदार निभाने वाले किशोर राजपूत बाबा कुटी में रहते हैं। किशोर ने बताया कि उनके सवा दो साल की बेटी पूर्णिमा है। वह उसे बेटे की तरह ही मानते हैं। उन्होंने बताया कि 8 अप्रैल 2013 को 'अमर उजाला माई सिटी' में छपी खबर पढ़कर उनका दिल दहल गया था।
खबर थी कि लाजपत नगर में केएमसी अस्पताल के सामने फेंकी गई एक नवजात बच्ची को कुत्ते नोच-नोच कर खा गए थे। उसके बाद से ही उन्होंने ठान लिया था कि समाज को कन्याओं के प्रति जागरूक करेंगे।
उन्होंने तब एक गीत लिखा। गीत को नाटक मंचन के दौरान उन्होंने गाया भी कि 'ओई माई री चुपके से मारा, क्यों मारा।