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शिवानी ने मेडल संग खुशियों से भरी पिता की झोली
पवन शुक्ला/ अमर उजाला, कौशाम्बी
Updated Fri, 24 Jan 2014 11:57 AM IST
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छोटे से गांव की बेटी शिवानी ने खेल के दम पर जो गौरव हासिल किया, उसने न सिर्फ उसके परिवार, स्कूल बल्कि पूरे जिले का नाम रौशन किया। स्पीड बाल की खिलाड़ी शिवानी ने कई मेडल जीत साबित किया दूर दराज के गांव की बेटियां भी किसी से पीछे नहीं हैं।
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कौशाम्बी जिले के मनोहरगंज निवासी विजय सिंह की बेटी शिवानी ने तमाम परेशानियों, बाधाओं को पारकर अपनी मेहनत, लगन और जज्बे से घर को सोने-चांदी के तमगों से भर दिया। खेती से परिवार का पेट पालने वाले किसान विजय की यह बेटी अपनी काबिलियत के दम पर स्पीड बाल की उभरती हुई सितारा बन गई है।
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शिवानी का जन्म 21 फरवरी 1998 को हुआ है। कौशाम्बी पब्लिक स्कूल कसिया में 11वीं क्लास में पढऩे वाली शिवानी पहले खो-खो खेलती थी। बाद में जब स्कूल में स्पीड बाल आया, तो उसने खो-खो छोड़कर इस खेल को अपना लिया।
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लगन और प्रतिभा को देखते हुए स्कूल के खेल प्रशिक्षक करनवीर और वीपी कुशवाहा ने उसके हुनर को तराशा। अप्रैल 2013 में उसने कानपुर में हुई राज्यस्तरीय स्पीड बाल प्रतियोगिता में सभी जिलों से आए प्रतिभागियों में खुद को चैम्पियन साबित करते हुए गोल्ड मेडल जीता।
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इसके बाद 11 मई 2013 को राजीव गांधी स्टेडियम दिल्ली में आयोजित स्पीड बाल की नेशनल चैम्पियनशिप ने उसने रजत पदक हासिल किया। एक नवंबर 2013 को राजनंदगांव छत्तीसगढ़ में आयोजित फेडरेशन स्पीडबाल प्रतियोगिता में भी शिवानी अव्वल रही और गोल्डेनगर्ल बनकर उभरी।
पिछले महीने 27 दिसंबर को इलाहाबाद में आयोजित राज्यस्तरीय और 30 दिसंबर को दिल्ली में हुई नार्थ जोन स्पीड बाल प्रतियोगिता में भी शिवानी ने गोल्ड मेडल हासिल करके देशभर में अपने हुनर का जलवा बिखेरा।
खुद शिवानी का सपना है कि वह इस खेल को विदेशों में जाकर खेले और पूरी दुनिया में देश का नाम जगमग करे। शिवानी के प्रशिक्षक करनवीर का कहना है कि इस लड़की में आगे बढऩे का जज्बा कूट-कूटकर है। वह अभी बहुत आगे जाएगी।
पिता अपनी बेटी के हौसले और उपलब्धियों से गदगद हैं। बोले कि बेटी-बेटे में फर्क नहीं होना चाहिए। बेटियां किसी भी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं। सभी को चाहिए कि बेटी-बेटे दोनों को आगे बढऩे का बराबर मौका दें। लड़कियां जिस भी क्षेत्र में अपना मुकाम बनाने की कोशिश करें, उसमें उनकी मदद करनी चाहिए।