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ममता ने गढ़ी ट्रैक की 'रानी'

Mon, 06 Jan 2014 11:57 AM IST
अमर उजाला, गाजीपुर
अमर उजाला, गाजीपुर Updated Mon, 06 Jan 2014 11:57 AM IST
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beti hi bachayegi, rani yadov

खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे, बता तेरी रजा क्या है...

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इन पंक्तियों के निहितार्थ को ममता यादव ने न केवल समझा, बल्कि अपनाया भी और जब उन्होंने अपने बेटे-बेटियों की तकदीर अपने हाथों लिखने का बीड़ा उठाया तो खुदा को उनकी हर रजा का ध्यान रखना पड़ा।

आप भले ही अभी ममता यादव को नहीं जानते होंगे, लेकिन अगर आप से यह कहा जाए कि ममता यादव उस एथलीट रानी यादव की मां हैं, जो कभी फटे जूते और पुराने ट्रैक सूट पहने ट्रैक पर उतरती थी और अब उसके खाते में आठ गोल्ड सहित 16 राष्ट्रीय पदक हैं।
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ममता ने गाय-भैंस पालकर दूध बेचा, खुद अपने हाथ से चारा-पानी किया, उपले पाथे और रानी को इस मुकाम तक पहुंचने में अपनी गरीबी को आड़े नहीं दिया। रानी ने भी मां के पसीने की इन बूंदों को राष्ट्रीय पदकों में बदल कर दिखाया।  
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माता-पिता की इकलौती संतान ममता शादी के बाद भी मायके में ही रहीं। उनके मन में भी ललक थी कि वह कुछ करें। पर घर की आर्थिक स्थिति और पारिवारिक रीति-नीति के चलते वह हाईस्कूल के आगे नहीं पढ़ पाईं। मगर बेटी रानी छठी में पढ़ते समय स्कूल की खेलकूद में अव्वल आई तो ममता ने संकल्प कर लिया, जो खुद नहीं कर पाई, वह बेटी से कराकर रहेगी।

आखिर बेटी भी तो अपना ही अंश है। चुनौतियां कई थीं, घर का खर्च दूध बेचकर जैसे तैसे चलता था। ऊपर से बेटी को एथलीट बनाने के खर्च के साथ चार अन्य बेटियों की पढ़ाई-लिखाई, शादी, तीन बेटों का भविष्य बनाने की चिंता सामने पहाड़ जैसी खड़ी थी। ममता ने सगे-संबंधियों और समाज से मदद की गुहार लगाई पर कोई आगे नहीं आया।

एक चिकित्सक ने 15 हजार रुपये महीना देने का वादा जरूर किया। तीन महीने तक वादा निभाया भी लेकिन इसके बाद मुंह मोड़ लिया। फिर भी ममता ने हार नहीं मानी। वर्ष 2003 में जब रानी ने नेशनल जूनियर वाकिंग रेस में गोल्ड मेडल जीता तो ममता के सपने साकार होते नजर आए।

आज न केवल रानी यादव राष्ट्रीय स्तर पर आठ स्वर्ण, पांच रजत और तीन कांस्य पदक जीत चुकी हैं, बल्कि उसकी चार बहनें और तीन भाई पढ़-लिख कर समाज में सम्मान पा रहे हैं।


ममता का सपना है कि रानी देश के लिए सोना जीते। रानी मां के इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए तिरुवंतपुरम स्टेडियम में प्रैक्टिस कर रही हैं। उन्हें कोच्चि में दस फरवरी को होने वाली सेकेंड ओपेन वाकिंग चैंपियनशिप में भाग लेना है।

रानी की उपलब्धियां
* 16वीं नेशनल नार्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप (2004) पानीपत में 3 किमी पद चालन में गोल्ड
* 16वीं नेशनल इंटर जोन जूनियर चैंपियनशिप मेरठ (2004) में 3 किमी पद चालन में स्वर्ण पदक
* 18वीं नेशनल इंटरजोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप इलाहाबाद (अक्तूबर 2006) में 5 किमी पद चालन में गोल्ड
* आठवीं नेशनल जूनियर फेडरेशन एथलेटिक्स चैंपियनशिप पुणे (मई 2008) में 10 किमी पद चालन में गोल्ड
* 20वीं नेशनल नार्थ जोन जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप लखनऊ (अगस्त 2008) में 10 किमी पद चालन में गोल्ड
* 20वीं नेशनल इंटर जोन जूनियर एथलेटिक्स सितंबर जमशेदपुर (2008 में) में 10 किमी पद चालन में गोल्ड
* 24वीं जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप मैसूर (नवंबर 2008) में 10 किमी पद चालन में गोल्ड
* आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स दिसंबर (2008 कोच्चि) में 5 किमी पद चालन में गोल्ड  
* आमंत्रण प्रतियोगिता 2010 मास्को में सिल्वर मेडल


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