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बीमार पिता का सहारा बनी, घर की भी संभाली जिम्मेदारी

Wed, 08 Jan 2014 01:11 PM IST
अमर उजाला, ज्ञानपुर
अमर उजाला, ज्ञानपुर Updated Wed, 08 Jan 2014 01:11 PM IST
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beti hi bachayegi, pooja baranwal

परिवार चलाने की जिम्मेदारी तो बेटे की थी लेकिन उसे निभाना पड़ा बेटी को। पिता की तबीयत खराब होने और काम करने में सक्षम न होने के कारण 16 साल की उम्र से पूजा ने जो भार उठाया वह आज भी जारी है।

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इस दौरान उसने अपनी पढ़ाई को भी प्रभावित नहीं होने दिया। पिता को भी अपनी बेटी पर नाज है और वह हर फैसला पुत्री की सलाह पर ही लेते हैं।

गोपीगंज नगर के फूलबाग निवासी प्रेम कुमार बरनवाल दस साल पहले तक व्यवसाय करके परिवार को चलाते थे लेकिन किसी बीमारी की चपेट में आने के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई।
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व्यवसाय पर ध्यान न दे पाने के कारण वह भी चौपट होता गया। आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होने के कारण परिवार की हालत दयनीय होती चली गई। ऐसे में सहारा बनी बेटी पूजा।
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बात सन 2004 की है। 16 साल की उम्र में जब बच्चे मां-पिता पर निर्भर होकर भविष्य के सपने बुनते हैं, उसने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए 500 रुपये प्रति माह पर एक प्रिटिंग प्रेस में नौकरी शुरू की।

इसके बाद 2006 में भदोही के एक मारुति शोरूम में काम करना शुरू किया। यहां करीब पांच साल तक नौकरी करने के बाद 2011 में मुथुट फाइनेंस में नौकरी शुरू की। वर्तमान में इसी कंपनी में नौकरी कर रही है।

नौकरी के साथ पूजा ने इंटरमीडिएट, स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई भी पूरी की। छोटी बहन आरती को भी इंटरमीडिएट तक पढ़ाया, इसके बाद उसने आगे पढऩे से मना कर दिया।


इस पर उसने आरती के लिए फूलबाग में ही एक छोटी दुकान खुलवा दी। इस समय पूजा परिवार को संभालने के साथ छोटे भाई सत्यम के भविष्य का भी ताना-बाना बुन रही है।

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