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बेटा बनकर घर संभाला पूजा ने

Wed, 08 Jan 2014 11:45 AM IST
सतीश शर्मा/अमर उजाला, मेरठ
सतीश शर्मा/अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 08 Jan 2014 11:45 AM IST
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beti hi bachayegi, pooja

वक्त की रफ्तार के साथ घर, समाज और परिस्थितियों की अग्निपरीक्षा में आज की बेटियां पूरी तरह खरी उतर रही हैं। जरूरत पडऩे पर बेटियों ने समाज को अहसास कराया है कि वह बेटों से किसी भी मायने में पीछे नहीं।

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मेरठ के धामपुर में दरियापुर गांव है, यहां की पूजा शर्मा ने अपने इकलौते भाई की असमय मौत के बाद गम में डूब चले परिवार को न केवल पहाड़ सा सहारा दिया, बल्कि बेटा बनकर घर की तमाम जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया।
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आलम ये है कि घर ही नहीं, पूरा गांव उसके जज्बे की इज्जत करता है। पूजा जीवनपर्यंत अपने परिवार को पुत्र और बहनों को भाई की कमी महसूस नहीं होने देना चाहती।
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राधेश्याम शर्मा और उनकी पत्नी मंजू की चार संतानों में से पूजा तीसरे नंबर की पुत्री हैं। वर्ष 2005 में पूजा जब बीए प्रथम वर्ष में थी तो इकलौते भाई कृष्णगोपाल की अचानक मौत से हंसता-खिलता परिवार बिखर गया।

कृष्ण गोपाल पर ही घर की जिम्मेदारी थी, जो उनके जाने के बाद पूजा के कंधों पर आ पड़ी। हताशा में डूबते घर का सहारा बनने के लिए पूजा ने घर के साथ ही खेत की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली।

इसी मेहनत का परिणाम रहा कि पिता के अस्वस्थ होने के बावजूद फसल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वर्ष 2011 पूजा ने छोटी बहन निक्की की शादी कर बड़े होने का फर्ज निभाया। बकौल पूजा, अब मैं अपने भतीजे और भतीजी को उच्च शिक्षा दिलाना चाहती हूं, जिससे उसके भाई के रूप में भतीजा आगे परिवार की पहचान को बेहतर ढंग से बना सके।

सरकारी नौकरी के लिए प्रयासरत
वर्तमान में मातेश्वरी हाईस्कूल कन्या विद्यापीठ अमरोहा में बतौर शिक्षक कार्य कर रही पूजा को सरकारी नौकरी की दरकार है। पूजा पुलिस विभाग में नौकरी कर अपने परिवार और समाज की सेवा करना चाहती हैं।

घर का बड़ा सहारा हैं पूजा
पूजा के माता पिता कहते हैं कि पूजा उनकी बेटी नहीं बेटा है। हमें उसका बड़ा सहारा है। घर में पूजा की भाभी, भतीजी शैली और भतीजा अनमोल हैं।

उनका कहना है कि पूजा ने मुश्किल वक्त में परिवार को संभाला है। एक बेटे की तरह हमारे लिए वह किया, जिस पर हमें नाज है। गांव वाले भी पूजा का सम्मान करते हैं।


पापा का सहारा
पूजा बताती हैं कि उनके पापा के पास हल की जमीन है। वर्ष 1981 में जब पापा जंगल में पावर कोल्हू चलाते थे तो उनका एक हाथ मशीन में आ गया था, जिससे उनका हाथ काम नहीं करता है। भाई की मौत के सदमे में वे बीमार रहने लगे थे।
 
छुट्टियों के दिनों में कराती है कृषि कार्य
पूजा ने बातचीत में बताया कि साप्ताहिक अवकाश व अन्य छुट्टियों में अपने घर में माता-पिता के परामर्श से खेती के पिछड़े कार्य को मजदूरों से कराती है।

अगर फसल में खाद डालने की जरूरत है तो बाजार से खाद उपलब्ध कराती है। खेत में इंजन लगवाकर मजदूरों से फसल की सिंचाई कराती है।

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