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‘श्रवण’ बन अपना दायित्व निभा रही चांदनी

Thu, 23 Jan 2014 01:38 PM IST
अनुराग त्रिपाठी/अमर उजाला, नोएडा
अनुराग त्रिपाठी/अमर उजाला, नोएडा Updated Thu, 23 Jan 2014 01:38 PM IST
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beti hi bachayegi noida

चांदनी ने अपने मां-बाप की सेवा करने और भाई के करिअर को परवान चढ़ाने के लिए अपने सपनों की तनिक भी परवाह नहीं की। यूनियन पब्लिक सर्विस कमिशन (यूपीएससी) में नौवां स्थान हासिल करने वाली चांदनी को इंडियन फॉरेन सर्विस (आईएफएस) के लिए चुना गया।

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उसके पास विदेश में एक शानदार करिअर और बेहतरीन जिदंगी जीने का मौका था, लेकिन चांदनी ने अपने मां-बाप की सेवा के इरादे से आईएफएस छोड़कर आईएएस बनने का विकल्प चुना।
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चांदनी का जन्म 1989 में हुआ। शुरुआती पढ़ाई नोएडा के समरविला स्कूल से हुई, जहां से उसने दसवीं पास की। इसके बाद दिल्ली के सरदार पटेल स्कूल से 12वीं पास करके लेडी श्रीराम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया।
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बीए की पढ़ाई करते समय चांदनी के भाई सागर सिंह का चयन विदेश के एक बैंक में हो गया। भाई के विदेश जाने पर मां-बाप की सेवा और उनकी जिम्मेदारी का बीड़ा चांदनी ने उठा लिया। सरकारी नौकरी होने से पिता एसी सिंह का दूसरे जिलों में तबादला होने की दशा में घर की जिम्मेदारी भी चांदनी ने अपने हाथों में ले ली।

मां विभा सिंह के साथ घर के छोटे-बड़े कार्यों को चांदनी ही निपटाती रही। इसके साथ उसने यूपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी। मां के हौसले और पिता की प्रेरणा से चांदनी ने 2012 में परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन अंतिम दौर में वह बाहर हो गई।

चांदनी इससे आहत नहीं हुई, बल्कि मां से मिले हौसले को हथियार बनाकर और मेहनत शुरू की। साल 2013 में चांदनी ने देश में नौवां स्थान हासिल किया। उसे विदेश में नौकरी का ऑफर दिया गया, लेकिन चांदनी ने इसे छोड़कर देश में ही नौकरी करने का विकल्प चुना।


शहर के पार्कों में बच्चों को पढ़ाया

शहर के कई पार्कों में ओपन स्कूल लगाकर गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम चांदनी ने ही शुरू किया। सेक्टर 15 के एक पार्क से इसकी शुरुआत हुई। बीए की पढ़ाई करने के दौरान उसने करीब तीन साल तक 70 से ज्यादा बच्चों को पढ़ाया।

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