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'बेटी ही बचाएगी' अभियान का कारवां पहुंचा जेल

Sat, 18 Jan 2014 05:59 PM IST
अमर उजाला, झांसी
अमर उजाला, झांसी Updated Sat, 18 Jan 2014 05:59 PM IST
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beti hi bachayegi in jail

'बेटी ही बचाएगी' अभियान का हिस्सा झांसी के जिला कारागार में निरुद्ध बंदी भी बन गए। विभिन्न अपराधों की सजा काट रहे कैदियों ने अभियान से भावनात्मक रूप से जुड़ते हुए बेटी के हक में शपथ ली।

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जेल का नाम जुबान पर आते ही दिमाग में एक दुर्दांत तस्वीर उभर आती है। लेकिन, यह ठीक नहीं है। यहां रहने वाले बंदी भी आम इंसान की तरह सामान्य दिल रखते हैं, जिसमें समाज के लिए भावनाएं भी होती हैं।
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यह अलग बात है कि वह परिस्थितियों के हाथों विवश हो अपराधियों की श्रेणी में चले गए। यह बात शुक्रवार को बेटी ही बचाएगी अभियान के तहत जेल में आयोजित कार्यक्रम में देखने को मिली।
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यहां निरुद्ध बंदियों में भी बेटी के प्रति वही प्रेम देखने को मिला, जो सामान्य लोगों में दिखाई देता है। कोई आजीवन कारावास की सजा काट रहा था, तो कोई दहेज उत्पीडऩ में बंद था। विभिन्न अपराधों में निरुद्ध महिला व पुरुष बंदी पूरी भावुकता के साथ अभियान का हिस्सा बने।

इस दौरान उन्होंने पूरे उत्साह के साथ शपथ पत्र भरकर बेटी के हक में शपथ ली। शपथ पत्र भरने के दौरान कई महिला बंदी व पुरुष बंदियों की आंखें अपनी बेटियों की याद कर नम हो गईं।

सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वह जेल से बाहर निकलने पर बेटियों के संरक्षण व उनके विकास के लिए कुछ न कुछ कार्य अवश्य करेंगे।

कड़क दिल भी पसीजे
आमतौर पर जेल अधिकारियों को कड़क स्वभाव का माना जाता है, लेकिन बेटी की बात पर यह दिल भी पसीजते नजर आए। शुक्रवार को बेटी ही बचाएगी अभियान का हिस्सा बनते हुए जेल अधिकारियों ने भी बेटी के हक में शपथ ली।

इस दौरान वरिष्ठ जेल अधीक्षक अनिल कुमार ने कहा कि बेटी समाज की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। लेकिन, समाज का एक बहुत बड़ा तबका जागरूकता के अभाव में बेटियों को उपेक्षा की नजर से देखता है।


उन्होंने कहा कि बेटियों के विकास के लिए तीन बातें बहुत जरूरी हैं। उनमें निर्णय लेने की क्षमता तभी आएगी, जब वह मजबूत होंगी। इसके लिए उनका शैक्षिक विकास होना बेहद जरूरी है।

साथ ही उन्हें रोजगारपरक भी बनाना होगा। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेटियों की राइट टू प्रॉपर्टी भी दिया जाना चाहिए।

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