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परिवार नहीं गांव भर में मिसाल बनी माधुरी

Sat, 18 Jan 2014 06:27 PM IST
पवन कुमार मिश्र/अमर उजाला, देवरिया
पवन कुमार मिश्र/अमर उजाला, देवरिया Updated Sat, 18 Jan 2014 06:27 PM IST
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beti hi bachayegi campaign in devaria

उस दौर में बेटियों को पढ़ाई-लिखाई के अवसर सीमित थे। बेटों की तरह बेटियों को आगे बढऩे की छूट भी नहीं थी। पुरुष की अतिप्रधानता वाले वक्त में पिता का साया उठते ही परिवार बिखरने की नौबत आ जाती थी।

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करीब 32 साल पहले ऐसी ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में घिरी थीं माधुरी, मगर हौसले से कदम बढ़ाए तो न सिर्फ खुद की पढ़ाई पूरी कर शिक्षक की जिम्मेदारी संभाली बल्कि छोटे भाई-बहनों की परवरिश का जिम्मा संभालने के साथ सभी को शिक्षक बनाने में कामयाब रहीं।
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आबकारी महकमे में नौकरी करने वाले भाटपाररानी के बेलपार पंडित गांव निवासी पवहारी पांडेय को आपातकाल के दौरान समय से पहले रिटायरमेंट दे दिया गया, जिसके बाद 1982 में ब्रेन हेमरेज से उनकी मौत हो गई।
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घर के मुखिया की सांसें थमते ही परिवार चुनौतियों में घिर गया। सात संतानों में बड़ी बेटी माधुरी मदन मोहन मालवीय डिग्री कॉलेज भाटपाररानी में बीएससी अंतिम वर्ष की विद्यार्थी थीं।

खुद की पढ़ाई रुकने के डर के साथ छोटे भाई-बहनों के भविष्य की चिंता भी सताने लगी। गांव के लोगों ने पढ़ाई छोडऩे की सलाह दी मगर माधुरी ने न सिर्फ पढ़ाई जारी रखी बल्कि खुद ही खेती संभाली।

शादी न करने का फैसला लेकर भाई-बहन को पढ़ाया और टीचर बनाने के साथ सभी की शादियां कराईं। खुद बनारस के कॉलेज में प्रिंसपिल डा.माधुरी की दूसरे नंबर की बहन मीरा रामदेई गर्ल्स इंटर कॉलेज अलीनगर गोरखपुर में अध्यापक हैं तो नयनतारा प्राथमिक विद्यालय गोरखपुर, पूनम लखनऊ के प्राथमिक विद्यालय में अध्यापक और नयनबाला प्राथमिक विद्यालय वाराणसी में प्रधानाध्यापक पद पर तैनात हैं।

भाई डॉ. विनय पांडेय बापू कृषक इंटर कॉलेज कड़सरवा बुजुर्ग में प्रधानाचार्य हैं। सबसे छोटे भाई आलोक भी जूनियर हाईस्कूल वाराणसी में अध्यापक हैं।

माधुरी ने बीएससी पास करने के बाद बीएड में नामांकन लिया। बीएड की परीक्षा में कॉलेज टॉप करने पर प्रख्यात साहित्यकार महादेवी वर्मा के हाथों उन्हें गोल्ड मेडल मिला।

महादेवी वर्मा ने कहा था कि यह बेटी आने वाले कल में समाज के लिए पथ-प्रदर्शक बनेगी। उनकी यह बात सच साबित हुई। माधुरी अपनी पढ़ाई के साथ निजी स्कूल में नौकरी करने लगीं।

इतिहास और राजनीति शास्त्र से एमए करने के बाद इतिहास विषय से गोरखपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि ग्रहण की। इसके बाद बिहार के सिवान जिले में वर्ष 2001 तक अध्यापक की नौकरी की।

इस दौरान आने-जाने में काफी संघर्ष करना पड़ा। इसके बाद उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग से वर्ष 2002 में गोपी राधा बालिका इंटर कॉलेज दुर्गाकुंड वाराणसी में प्रधानाचार्य पद पर चयनित हुईं।

बिहार में स्कॉउट गाइड के तहत सामाजिक और बालिकाओं के विकास के लिए काम करने पर डॉ. माधुरी को राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है।

2004-05 में काशी विदुषी सम्मान से उन्हें नवाजा गया। इसके अलावा कई सामाजिक संगठनों ने उनके सामाजिक कार्यों के लिए सम्मानित किया है। वाराणसी में गंगा निर्मलीकरण के लिए चलाए जा रहे अभियान में वह शामिल हैं।


बड़ी बहन होने के साथ एक अभिभावक की भूमिका निभाती रहीं। वह हम सब भाई बहनों के लिए देवी से कम नहीं हंै। उनका त्याग और परिवार के प्रति समर्पण हमें प्रेरणा देता है। वह चुपके से अपने तनख्वाह का एक चौथाई भाग बालिकाओं के शिक्षा पर खर्च करती हैं। इसकी जानकारी उन्होंने कभी किसी को नहीं दी।- डॉ. विनय पांडेय (भाई)

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