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हर मोर्चे पर खुद को साबित कर रही बेटियां

Mon, 06 Jan 2014 11:12 AM IST
एजाज अहमद/अमर उजाला, बिजनौर
एजाज अहमद/अमर उजाला, बिजनौर Updated Mon, 06 Jan 2014 11:12 AM IST
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beti hi bachayegi, Bijnaor ki Fojia Eram

बेटियां उम्मीद की किरण होती हैं। परिवार का नाम रोशन करने में बेटियां बेटों से पीछे नहीं रहतीं। यह बात 'अमर उजाला' की बेटी ही बचाएगी पेंटिंग प्रतियोगिता में जनवरी माह के कलेंडर के लिए चुनी गई पेंटिंग की चित्रकार नजीबाबाद निवासी फौजिया इरम ने कही।

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बेटियां परिवार के लिए बोझ नहीं होतीं। ये बगिया की उस कली के समान होती हैं, जिनके खिलने पर परिवार महकता है। शौकिया चित्रकारी से जुड़ी फौजिया इरम कहती हैं भ्रूण हत्या रोकने के लिए 'अमर उजाला' ने बेटी ही बचाएगी...अभियान से समाज में अनूठी क्रांति का संचार किया है।
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नजीबाबाद के पठानपुरा निवासी सैयद नजम अली उर्फ बाबर की पत्नी फौजिया इरम ने 'अमर उजाला' की पेंटिंग प्रतियोगिता में चुनी गईं 12 प्रविष्टियों में जनवरी माह के नववर्ष कलेंडर में अपनी पेंटिंग को स्थान दिलाया। पेंटिंग में गर्भ में पलने वाली बच्ची को मशाल हाथ में थामे दिखाया गया।
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फौजिया कहती हैं कि यह मशाल उस रोशनी का द्योतक है, जिसे समाज रोशन होने से पूर्व बुझाने का शर्मनाक प्रयास करता है।

Fojia Eram

















बचपन से चित्रकारी में शौक रखने वाली फौजिया को चित्रकला की प्रेरणा अपनी फूफी रेहाना खातून से मिली। नौ फरवरी 1982 में जन्मी फौजिया ने आरबीडी बिजनौर से स्नातक और वर्धमान कॉलेज बिजनौर से 2003 में अंग्रेजी में स्नातकोत्तर किया।


पिता रईस अहमद की लाडली फौजिया इरम के दो बेटियां मारिया (5) और फातिमा (3) हैं। फौजिया कहती हैं कि बेटियां बेटों से कभी कम नहीं होतीं। उनका दावा है कि एक बेटी कई परिवारों की बगिया को महकाती है।

मारिया और फातिमा पति नजम एवं उनके कलेजे का टुकड़ा हैं। उन्हें अच्छी शिक्षा दिलाना ही उनका लक्ष्य है।

फौजिया का कहना है कि बेटियां हर क्षेत्र में हुनर दिखा रही हैं। बेटियों के प्रति समाज की सोच सकारात्मक हुई है। जरूरत है 'अमर उजाला' जैसे क्रांतिकारी विचार को समाज द्वारा अपनाने और आत्मसात करने की।

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