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'बेटी की कामयाबी पर है गर्व'
सुधाकर सिंह/अमर उजाला, मिर्जापुर
Updated Mon, 06 Jan 2014 12:47 PM IST
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बिना संसाधन और सहयोग के अगर कोई बिटिया खेल जगत में ऊंचाइयों को छुए तो उसकी हिम्मत की दाद देनी होगी। इसका उदाहरण है जिले के जमालपुर ब्लाक के ग्राम पंचायत डेढ़ौना के मजरा चकईपुर निवासी किसान रामललित सिंह की पुत्री सुषमा सिंह।
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युवा खिलाड़ी सुषमा लगन और मेहनत से पढ़ाई में सदैव अव्वल रही। वह एथलेटिक्स खिलाड़ी के तौर पर भी जिले का मान बढ़ा रही है।
माता रामा देवी और पिता राम ललित सिंह की बेटी सुषमा (22) ने यह ठान लिया है कि उसे एक दिन ओलंपिक में भाग लेकर विश्व में जनपद का नाम रोशन करना है।
एक भाई और पांच बहनों में सबसे छोटी सुषमा ने राष्ट्रीय, प्रांतीय एवं जनपदीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग लेकर प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वर्ष 2007 से 2012 तक उसने देश के कई हिस्सों में विभिन्न एथलेटिक्स स्पर्धाओं में भाग लेकर सबसे तेज धाविका का खिताब अपने नाम किया है।
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सुषमा ने वर्ष 2007 में पुणे में आयोजित नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप के आठ सौ मीटर दौड़ में भाग लेकर गोल्ड मेडल हासिल किया। वर्ष 2009 में केरल के कोच्चि में आयोजित नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर 1500 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया है।
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वर्ष 2011 में आंध्र प्रदेश में आयोजित अंतर विश्वविद्यालयीय चैंपियनशिप के 1500 मीटर दौड़ में भाग लेकर गोल्ड मेडल प्राप्त कर सबसे तेज धाविका बनने का खिताब अर्जित किया। सुषमा ने दसवीं जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय डेढ़ौना से तथा देवकली इंटर कालेज जमालपुर से इंटर की पढ़ाई पूरी की।
स्नातक की डिग्री लालता सिंह राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अदलहाट से प्राप्त की है। वर्तमान में वह काशी हिंदू विश्वविद्यालय से बीपीएड अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही है।
सुषमा को किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिलती है। पिता रामललित सिंह का कहना है कि उनके पास इतने संसाधन नहीं है कि वह बेटी के लिए कुछ कर सकें। कहा कि शासन-प्रशासन ध्यान दे तो उनकी बेटी खेलकूद के क्षेत्र में और बेहतर कर सकती है। सीमित संसाधनों के बल पर बेटी ने जितना अब तक किया, उस पर उन्हें गर्व है।
जनपद के लिए कुछ करने की तमन्ना
कच्चे मकान और अभावों के बीच रहने वाली होनहार खिलाड़ी सुषमा का कहना है कि जनपद के लिए कुछ करने की हसरत उसके अंदर है। गांव के आसपास कोई मैदान न होने के कारण वह प्रतिदिन सुबह-शाम चार घंटे गांव से सटे सड़क के किनारे दौड़ कर ओलंपिक में जाने के लिए अभ्यास करती है।