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'सपने बेटियों के भी पूरे होने चाहिए'
पंकज शुक्ल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 09 Jan 2014 01:06 PM IST
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मेरे मुताबिक एक बच्चे के लिए सबसे ज़रूरी अगर ये है कि वो जीवन में सही संस्कार पाए और सही रास्ते पर चले, तो उनका मार्गदर्शक बनने के साथ ही माता-पिता को ये भी जानना होगा कि बच्चा बनना क्या चाहता है?
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तब दीपिका 18 साल की थी, जब उसने अपने मन की बात हमें बताई। हमें इस बात की चिंता नहीं हुई कि तेजी से मंजिल की तरफ बढ़ता बैडमिंटन का बना-बनाया करियर छोड़ दीपिका ने ये क्या सोच लिया?
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हमें चिंता हुई तो बस ये कि इस उम्र में वह मुंबई को अपना पाएगी? ऊपर से सिनेमा के मामले में मेरा कोई अनुभव भी नहीं। न ही कोई जान-पहचान। लेकिन, जीवन में दिल की सुनना बहुत ज़रूरी होता है।
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दिमाग की आवाज़ तो हम फेल होने के बाद भी सुन सकते हैं। ज़िंदगी में ये मलाल नहीं रहना चाहिए कि हमने जो सोचा, उसे पाने की हमने कोशिश नहीं की।
आजकल कोई भी करियर ऐसा नहीं, जहां शोषण की आशंकाएं न हों। ये हम पर निर्भर करता है कि हमारी प्राथमिकताएं क्या हैं? और दीपिका को ये शुरू से मालूम था।
मैंने उसे बता रखा था कि हमारी हर कोशिश कामयाब हो, ये ज़रूरी नहीं है। हम जो सब कुछ जीवन में पाना चाहते हैं, वह मिल ही जाए ये भी ज़रूरी नहीं है। कुछ पाने के लिए हमें कुछ खोना पड़ता है।
बस हमें पाने की जिद पता होनी चाहिए और खोने की हद। बाकी सब हिसाब अपने-आप होता है, बशर्ते हमारा प्रयास हर दिन उतना ही सौ फीसदी हो, जितना पहले दिन था।
मुझे खुशी है कि दीपिका ने मेरी इस बात को न सिर्फ याद रखा, बल्कि उसने कामयाबी छूकर ये मिसाल भी कायम की। दीपिका और अनिशा दोनों एक दूसरे को बखूबी समझती हैं। दोनों को अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियां पता हैं।
दीपिका शुरू से बहुत ही संयत स्वभाव और इरादों की पक्की लड़की रही। अनिशा ने भी अपनी बहन को काफी कुछ फॉलो किया है। मुझे याद है कि दीपिका जब टूर्नामेंट खेलने जाती थी तो कभी वह अपने सरनेम को लेकर इतराई नहीं।
उसने वही सब कुछ किया जो टीम के बाकी लोग करते थे। कुछ भी अलग नहीं। जीवन में दूसरों का आदर्श बनने के लिए आपको खुद सहज और सरल रहना होता है। अब भी वह बैंगलोर में होती है तो घर में मेहमानों की तादाद बढ़ने पर ज़मीन पर बिस्तर लगाकर सोती है। वह शुरू से ही अपना काम खुद करती।
मुझे लगता है कि लगभग सभी बेटियां अपनी मां के ज़्यादा करीब होती हैं। जीवन को करीने से जीने की कला दीपिका ने मां से ही सीखी है। दीपिका के सुपरस्टार बनने पर न मैंने कभी ज़्यादा गौर किया और न ही घर के दूसरे लोगों ने।
दीपिका ने भी कभी ऐसा कुछ किया नहीं कि हमें लगा हो कि अरे ये तो स्टार हो गई। हां, उसे अब हमारे साथ छुट्टियां बिताने का ज़्यादा वक़्त नहीं मिलता।