उल्टा पड़ा मोदी का दांव, गुजरात पुलिस के कारण नहीं दी गई थी इजाजत
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चुनाव आयोग ने कहा है कि गुजरात पुलिस की सूचना के आधार पर ही वाराणसी में मोदी की रैली को अनुमति न देने का फैसला किया गया।
गुजरात पुलिस ने रैली स्थल को मुफीद नहीं माना था। लेकिन आयोग ने भाजपा को रैली की अनुमति न देने के फैसले की जानकारी देने में देरी होने पर अफसोस जताया।
चुनाव आयुक्त एच.एस. ब्रह्मा ने नई दिल्ली में कहा कि भाजपा के पीएम उम्मीदवार की सुरक्षा टीम से जुड़े गुजरात पुलिस के एक अधिकारी ने यह संकेत दिया था कि रैली के लिए जिस जगह का चुनाव किया गया है वह मुफीद नहीं है।
चुनाव आयोग ने खोला राज
इस अधिकारी का कहना था कि इस जगह पर रैली नहीं की जा सकती क्योंकि यह काफी संकीर्ण है। यह काफी घिरा हुआ भी है। इसके बाद ही रैली की अनुमति से इनकार का फैसला किया गया।
हालांकि इस मामले में चुनाव अधिकारी और भाजपा के बीच कम्यूनिकेश गैप रहा। चुनाव अधिकारी को इस फैसले के बारे में पार्टी को जल्दी बता देना चाहिए था।
चुनाव आयुक्त ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है लेकिन इसे अब इतना तूल नहीं देना चाहिए कि मामला चुनाव आयोग तक पहुंच जाए।
आयोग का तर्क हजम नहीं हुआ: भाजपा
भाजपा ने चुनाव आयोग के इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया कि सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर नरेंद्र मोदी की रैली को अनुमति नहीं दी गई। पार्टी ने कहा कि अगर आयोग ने इस मामले में तुरंत कदम उठाया होता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।
पार्टी ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के पास मोदी से ज्यादा सुरक्षा है और उन्हें अनुमति दी गई लेकिन उसके पीएम उम्मीदवार को उन्हीं के चुनाव क्षेत्र में रैली की अनुमति क्यों नहीं दी गई।
भाजपा के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर इस मामले में तुरंत कदम उठाया होता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था। भाजपा ने बृहस्पतिवार को वाराणसी के बेनियाबाग में मोदी की रैली को अनुमति न दिए जाने के बाद शुक्रवार को यह प्रतिक्रिया जताई।