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आईपीएस अधिकारी ने ममता पर लगाया परेशान करने का आरोप
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Fri, 23 Aug 2013 04:20 PM IST
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आईएएस और आईपीएस अफसरों और सरकार की लड़ाई में एक और मामला जुड़ गया है।
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कोलकाता के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नजरूल इस्लाम ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर उनकी पदोन्नति रोकने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप लगाया है।
नजरूल के अनुसार कुछ उच्च अधिकारी भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अधिकारियों ने उन पर आरोप तय करते समय सुप्रीम कोर्ट के फैसले से छेड़छाड़ की है।
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नजरूल का कहना है कि मुख्य सचिव, गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक ने परेशान करने और बदनाम करने के लिए उनके खिलाफ आपराधिक साजिश रची है।
नजरूल इस्लाम एक समय ममता बनर्जी के करीबी भी रहे हैं।
हारे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में 17 अगस्त को नजरूल ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इससे पहले उन्होंने एक जुलाई को मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा था कि उनकी शिकायतों का जवाब 22 जुलाई तक न मिलने पर वह सीएम के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराएंगे।
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उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि उन्हें मुख्यमंत्री और उनके वरिष्ठ अधिकारियों ने अपमानित, परेशान और बदनाम करने की कोशिश की है।
कभी दोस्त तो कभी दुश्मन
पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की सरकार के समय नजरूल इस्लाम ममता बनर्जी के खेमे के माने जाते रहे। बुद्घदेब भट्टाचार्य सरकार के साथ उनके मतभेद थे। तब ममता बनर्जी रेलमंत्री थीं।
ममता ने नजरूल को ईमानदार अफसर बताते हुए उनके लिए रेलवे में एक खास पद भी बनाया था। फिर मुख्यमंत्री बनने पर उन्होंने नजरूल को मुख्यमंत्री कार्यालय में स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर बना दिया था। लेकिन यह दोस्ताना लंबे समय तक नहीं चला और मतभेद शुरू हो गए।
नजरूल की साल 2012 में एक किताब आने पर ममता सरकार और उनके बीच मतभेद अपने चरम पर पहुंच गया और सरकार ने नजरूल कि किताब को सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने वाला बताया।
इसके बाद वे आईपीएस ऑफिसर केंद्रीय प्रशासनिक प्राधिकरण के समक्ष अपनी शिकायत लेकर गए लेकिन वहां सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। पिछले हफ्ते प्राधिकरण ने नजरूल को आरोपों से बरी कर दिया और उनकी किताब में कुछ भी आपत्तिजनक न होने की बात कही।
ममता के ग्रीटिंग के जवाब में फंसे
ममता बनर्जी की ओर से तीन फरवरी को इस्लाम के जन्मदिन पर एक ग्रीटिंग भेजा गया था। इसके जवाब में इस्लाम ने ममता की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करते हुए एक 76 पेज का पत्र लिखा।
इसके बाद मई में गृह सचिव बासुदेब बनर्जी ने मुख्यमंत्री के लिए अभ्रद और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में उनके खिलाफ जांच बैठा दी। नजरूल इस मामले को लेकर फिर से प्राधिकरण के पास गए और इन आरोपों का खारिज किया।