फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   being maoist is not a crime, says kerala high court

कोर्ट का अहम फैसला, 'माओवादी होना कोई अपराध नहीं'

Fri, 22 May 2015 09:00 PM IST
Updated Fri, 22 May 2015 09:00 PM IST
विज्ञापन
being maoist is not a crime, says kerala high court

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसले में कहा कि माओवादी बनना कोई अपराध नहीं है। एक मामले में केरल पुलिस को झटका देते हुए कोर्ट ने कहा कि आप किसी व्यक्ति को केवल इस आधार पर गिरफ्तार नहीं कर सकते कि वो किसी माओवादी संगठन से जुड़ा है।

विज्ञापन


माओवादी होने के शक में केरल पुलिस के विशेष दस्ते द्वारा गिरफ्तार किए गए श्याम बालकृष्णन से संबंधित मामले में अपने फैसले में जस्टिस ए मुहम्मद मुश्ताक ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन हिंसा या घृणा फैलाता है तो कानूनी एजेंसी ऐसे व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती हैं।
विज्ञापन


गिरफ्तारी पर कानून की वैधानिक प्रक्रिया को निर्धारित करने का अधिकार संविधान के पास है, का उल्लेख करते हुए जज ने कहा कि ऐसे में पुलिस मात्र इस आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है कि वह माओवादी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि माओवादी होना अपराध नहीं है, हालांकि माओवादियों की राजनीतिक विचारधारा हमारी संवैधानिक शासन व्यवस्था के साथ तालमेल नहीं बिठा पाई। मानवीय आकांक्षाओं के बारे में सोचना एक बुनियादी मानव हक है।

राज्य सरकार पर एक लाख रुपए जुर्माना

being maoist is not a crime, says kerala high court

मामले का निपटारा करते हुए अदालत ने सरकार को दो माह के अंदर बालकृष्णन को 1 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही सरकार को मुकदमेबाजी की लागत 10 हजार रुपये भी चुकाने का आदेश दिया। हालांकि अदालत ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने संबंधी आवेदन को नकार दिया।

बालकृष्णन की गिरफ्तारी की मात्र एक वजह उसका संदिग्ध माओवादी होने का जिक्र करते हुए अदालत ने कहा कि पुलिस ने बालकृष्णन की गिरफ्तारी कर अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है क्योंकि उसने ऐसा करने से पहले यह जानना जरूरी नहीं समझा कि वह किसी संज्ञेय अपराध में शामिल था या नहीं।

केरल के वायनाड जिले के रहने वाले बालकृष्ण को माओवादियों से निपटने वाली पुलिस की स्पेशल विंग थंडरबोल्ट ने 20 मई 2014 को गिरफ्तार किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed