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आडवाणी और जेटली को ईसाई क्यों नहीं बनाया?

Updated Tue, 31 Mar 2015 05:36 PM IST
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being christian in india

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''हवा तू मुझे ले चल मथुरा उड़ा कर, मुझे मुरली वाले की याद आ रही है"। मैंने तक़रीबन 45 साल पहले जन्माष्टमी के मौके पर एक फ़िल्मी गाने की तर्ज पर बना यह भजन 24 घंटे लगातार चलने वाले अखंड कीर्तन में गाया था। मैंने आज जब पूर्व पुलिस अधिकारी जुलियो रिबेरो का लेख पढ़ा, मुझे अचानक उस जन्माष्टमी की याद आ गयी। रिबेरो ने कुछ दिन पहले कुछ गिरजाघरों पर हुए हमलों के बाद अपनी निराशा जताते हुए यह लेख लिखा था।
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बात उस समय की है जब हम लोग नई दिल्ली में तिलक ब्रिज से मिंटो ब्रिज को मिलाने वाली राउज़ एवेन्यू रोड पर रहते थे, जिसे आज कल दीनदयाल उपाध्याय मार्ग के नाम से जाना जाता है।


अखंड कीर्तन में ईसाई का भजन
हमारा मकान नंबर दो था और उससे सटे तीन नंबर मकान में पंडित रामचरण और उनका परिवार रहता था। हालांकि पंडित रामचरण सरकारी नौकरी में थे, लेकिन वो और उनके दो बेटे रामनाथ और रामाधार लोगों के घरों पर पूजा-पाठ और हवन इत्यादि भी कराते थे और साथ ही कीर्तन पाठ भी। उस जन्माष्टमी को इन्हीं पंडित रामचरण के घर के सामने 24 घंटे का अखंड कीर्तन था। लेकिन कीर्तन अभी 6-7 घंटे ही चला था की अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गयी।

तेज़ हवा की वजह से पंडाल तक उड़ गया। कीर्तन में गाने वाली मंडलियों का भी दूर तक नामो-निशान तक नहीं था। लेकिन क्योंकि कीर्तन 6-7 घंटे चल चुका था इसलिए उसे रोकना अपशुकन हो सकता था।
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