युवती के बलात्कार और आत्महत्या के पीछे 'शौचालय' जिम्मेदार?
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में करीब एक हफ्ते पहले एक लड़की के साथ हुए दुष्कर्म और उसके के बाद उसकी आत्महत्या के मामले में जो वजहें सामने आई हैं उसमें सबसे बड़ी वजह घर में शौचालय का न होना है।
बीते मंगलवार दुष्कर्म का शिकार हुई 16 साल की युवती ने अगली सुबह समाज के भय से आत्महत्या कर ली थी। स्थानीय पुलिस के मुताबिक युवती ने बुधवार की सुबह खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली। उन्होंने बताया कि दुष्कर्म के आरोपी निर्देश वर्मा (18) को गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन इस घटना के बाद यह सवाल एक बार फिर से मुंह खोल कर सबके सामने खड़ा हो गया कि आखिर लोग अपने घर में शौचालय क्यों नहीं बनवाते।
युवती के परिजनों के मुताबिक उनके पास इतने पैसे ही नहीं हैं कि वे घर में शौचालय बनवा सकें। उन्होंने कहा कि हम खुले में शौच करने शौक से नहीं जाते बल्कि यह हमारी मजबूरी है। यह मजबूरी केवल इसी परिवार की नहीं है बल्कि गांव में रहने वाले उन 500 लोगों की भी है जिनके पास शौचालय बनवाने के लिए पैसे तक नहीं है।
डीएम ने तलब की रिपोर्ट
हालात यह है कि गांव के पूर्व प्रधान ओम प्रकाश के घर भी शौचालय की सुविधा नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार हमारी कोई मदद नहीं करती जिससे कि हम घरों में शौचालय बनवा सकें। लेकिन वहीं के एक स्थानीय निवासी ईश्वर दीन वर्मा के घर में शौचालय है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की योजना के तहत करीब चार साल पहले ही शौचालय बनवा लिया था। उन्होंने गांव वालों पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने कई दूसरे गांववालों के लिए भी शौचालय बनवाए थे लेकिन उन लोगों ने अपनी सुविधानुसार उसे रसोईघर या फिर किसी दूसरे काम के लिए इस्तेमाल करते है। वहीं गांव के ही एक युवती परवीन बानों का कहना है कि सरकारी सुविधाओं का लाभ केवल 'अमीर लोगों' को ही मिलता है।
लखीमपुर से जिलाधिकारी किंजल सिंह ने पीड़ित युवती के घर का मुआयना करने के बाद कहा, 'ऐसी घटनाओं के बाद ही बाद ही घर में शौचालयों की कमी महसूस की जाती है और यह महिलाओं की असुरक्षा का सबसे बड़ा कारण है।' जिलाधिकारी ने कहा कि उन्होंने एसपी अखिलेश चौरसिया से रिपोर्ट तलब किया है। इसके अलावा उन्होंने प्रमुख गृह सचिव को पत्र लिखकर गोला थाना प्रभारी के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।