बहुमत से पहले बड़ी डील नहीं करेगी भाजपा
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महाराष्ट्र में भले ही देवेंद्र फडनवीस की ताजपोशी हो गई हो, मगर शिवसेना के सरकार में शामिल होने की चर्चाएं अभी काफी गर्म हैं। शिवसेना अपनी कुछ शर्तों के साथ दस नवंबर से पहले सरकार में शामिल होना चाहती है, जबकि माना जा रहा है कि भाजपा बहुमत साबित करने से पहले शिवसेना के साथ कोई बड़ी डील नहीं करेगी।
शिवसेना सरकार में शामिल होने के लिए उपमुख्यमंत्री समेत दस मंत्री पद चाहती है और इसके लिए सांसद अनिल देसाई को काम पर लगाया है। मगर भाजपा के रुख से लगता है कि शिवसेना को अभी कुछ दिन और इंतजार करना पड़ेगा। शनिवार को शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने मातोश्री में पार्टी के नेताओं के साथ बैठक कर भविष्य की रणनीति पर मंथन किया।
शिवसेना प्रवक्ता नीलम गोन्हें ने बताया कि यह अनौपचारिक बैठक थी। भाजपा के साथ सरकार में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने 'इंतजार करो और देखो' का इशारा दिया। उधर, आगामी 10 से 12 नवंबर के बीच महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है, जिसमें नए विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस बहुमत साबित करेंगे।
शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होकर उद्धव ठाकरे ने रिश्तों में सुधार की ओर जो कदम बढ़ाया है, उसके बाद अब शिवसेना चाहती है कि सत्र से पहले भाजपा हर चीज साफ कर दे। इस बीच कैबिनेट मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि चर्चा जारी है लेकिन कोई समयसीमा निश्चित नहीं है।
फिलहाल, भाजपा शपथ समारोह के बाद अब एक बार फिर विधानसभा में बहुमत साबित करते समय भी शिवसेना को परखेगी उसके बाद ही सरकार में शामिल करने का निर्णय लेगी।
सिर्फ फडनवीस के फोन पर आए थे उद्धव
भाजपा सूत्रों के अनुसार, शपथ ग्रहण समारोह में देवेंद्र फडनवीस के फोन पर ही उद्धव वानखेड़े स्टेडियम आए थे। फडनवीस ने उद्धव के अलावा उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे से भी फोन पर बात की थी और उनको इस मामले में सकारात्मक रुख अपनाने को कहा था।
फडनवीस ने कहा था कि मंच पर उनके नाम की कुर्सी रहेगी यदि वे नहीं आते हैं तो कुर्सी खाली रहेगी। इसके बाद उद्धव ठाकरे और रश्मि ठाकरे शपथ समारोह में पहुंचे।
हालांकि शिवसेना की ओर से बताया गया कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के फोन के बाद उद्धव ठाकरे शपथ समारोह में शामिल हुए।
शिवसेना के नेता मीडिया को यह भी बता रहे हैं कि भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने भी उद्धव ठाकरे को फोन कर कहा था कि वे शपथ समारोह में शामिल हों और गठबंधन पर नए सिरे से चर्चा शुरू करें। पर, भाजपा सूत्रों का कहना है कि यदि अमित शाह और जेटली के फोन पर आने की बात कहकर शिवसेना अपना ईगो संतुष्ट करना चाहती है तो बीजेपी को क्या ऐतराज हो सकता है।
जनता को हल्के में न ले भाजपा
महाराष्ट्र में भाजपा की नई सरकार बनने के दूसरे दिन ही शिवसेना ने भाजपा को सलाह दी है कि वह जनता को हल्के में न ले। आम आदमी से किए अपने वादे को पूरा करे।
शिवसेना ने पार्टी के मुखपत्र सामना में महाराष्ट्र की जनता को सास और भाजपा सरकार को नवविवाहिता बताते हुए कहा है कि जिस तरह शुरुआत में नई नवेली दुल्हन को अपनी सास को खुश रखना पड़ता है उसी तरह भाजपा सरकार को भी जनता को खुश रखना होगा।
हालांकि, इस सास का धर्म बहू का उत्पीड़न करना नहीं है, लेकिन नई बहू सास पर सवारी करने का प्रयास करेगी तो उसके कान खींचे जाएंगे। संपादकीय में शिवसेना ने भाजपा के शाही शपथ समारोह की जोरदार प्रशंसा करते हुए भाजपा सरकार को कई नसीहतें दी है। छत्रपति शिवाजी युग की याद दिलाते हुए शिवसेना ने कहा है कि सरकार का ध्यान रईसों और धन्नासेठों पर नहीं बल्कि गरीबों पर होना चाहिए।
चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करने के लिए सरकार के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है लेकिन महाराष्ट्र की जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें हैं, इसलिए महाराष्ट्र को अखंड रखते हुए भाजपा सरकार जनता को दिए गए आश्वासनों की यथाशीघ्र पूरा करे। शिवसेना ने कहा है कि कांग्रेस-एनसीपी के शासन में मंत्रालय में आग लगी, जिससे मंत्रालय का महत्वपूर्ण हिस्सा जलकर खाक हो गया।
लेकिन इस आगजनी से पहले ही कांग्रेस-एनसीपी के कुशासन ने जनता की आकांक्षाओं को खाक में मिला दिया था। शिवसेना ने सवालिया लहजे में कहा है कि क्या उस राख से नए सपनों का फिनिक्स पक्षी उड़ान भर पाएगा? इस सवाल के साथ ही शुभकामना भी दी है कि नए मुख्यमंत्री के हाथों उम्मीदों का पक्षी उड़ान भरने में समर्थ हो।