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चुनाव से पहले नीतीश ने लगाया 'मास्टर स्ट्रोक'

Thu, 23 Apr 2015 01:45 AM IST
Updated Thu, 23 Apr 2015 01:45 AM IST
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Before election Nitish take big decision.

विधान मंडल सत्र के आखिरी दिन नीतीश कुमार ने बड़ा सियासी दांव खेला।

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एक ओर जहां तेली समाज और चौरसिया को अति पिछड़ा वर्ग में लाकर भाजपा के कोर वोट बैंक में सेंधमारी का प्रयास किया है, वहीं गरीब सवर्णों को प्रोत्साहित कर लालू फैक्टर को कमजोर करने की भी कोशिश की है।

बिहार विधानसभा चुनाव में जाने से पहले जातिगत समीकरण साधने के लिए यह नीतीश कुमार का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने भाजपा के वोट बैंक माने जाने वाले सवर्णों और वैश्यों को एक साथ तोहफा देकर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बुधवार को गरीब सवर्ण छात्रों के लिए छात्रवृत्ति का एलान कर दिया।

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लालू फैक्टर को कमजोर करने की कोशिश

Before election Nitish take big decision.

मुख्यमंत्री ने कहा कि डेढ़ लाख तक वार्षिक आय वाले सवर्ण परिवार के बच्चों को अन्य सुविधाओं के साथ-साथ बिहार बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में प्रथम श्रेणी से पास होने वाले दस हजार की छात्रवृत्ति मिलेगी।

भाजपा के कैडर वोट में बड़ी सेंधमारी करते हुए नीतीश ने वैश्यों में सबसे ज्यादा तादाद वाली तेली जाति को अति पिछडा वर्ग में शामिल करने का एलान कर दिया।

इसके साथ ही चौरसिया को भी इस श्रेणी में ले लिया गया है। साथ ही नाराज चल रहे सरकारी कर्मचारियों को खुश करते हुए नीतीश ने संविदा पर नियुक्त सभी कर्मचारियों को स्थायी करने के लिए एक कमेटी के गठन की घोषणा की है। वहीं माझी गुट के नीतीश मिश्रा का दावा है कि सरकार ने माझी के फैसले को ही आंशिक रूप से स्वीकार किया है।

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