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एएमयू में ‘बीफ बिरयानी’ पर विवाद गरमाया

Sat, 20 Feb 2016 01:05 PM IST
Updated Sat, 20 Feb 2016 01:05 PM IST
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beaf biryani matter in AMU

जेएनयू में देश विरोधी नारे और छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी को लेकर मचा सियासी घमासान अभी थमा भी नहीं है कि एएमयू के मेडिकल कॉलेज की एक कैंटीन में ‘बीफ बिरयानी’ परोसने के मसले को गरमाने की कोशिश शुरू हो गई है।

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शुक्रवार की दोपहर मेडिकल कॉलेज की कैंटीन के मीनू बोर्ड पर ‘बीफ बिरयानी’ का जिक्र होने पर जब एक मीडिया कर्मी ने फोटो ली तो खलबली मच गई। इसके तुरंत बाद ही कैंटीन पहुंची एएमयू प्रोक्टोरियल बोर्ड टीम ने कैटीन में लगे तमाम बोर्ड उतरवा दिए।
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साथ ही कैंटीन संचालकों को बोर्ड पर लिखे जाने वाले शब्दों के चयन को लेकर एहतियात बरतने के सख्त निर्देश दिए गए। एएमयू के डायनिंग हॉलों और हॉस्टल में भी इस तरह के शब्दों के प्रयोग पर एहतियात बरतने को कहा गया।
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दूसरी तरफ, एक वर्ग ने बोर्ड का फोटो और फुटेज कुछ देर में ही सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसके बाद इस पर बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद और दूसरे हिंदूवादी संगठनों ने तीखे कमेंट आने शुरू हो गए।

इस मामले में मेयर शकुंतला भारती ने पूरे प्रकरण को जिला प्रशासन के समक्ष उठाने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि शनिवार को इस संबंध में वह जिला और पुलिस प्रशासन से बात करेंगी। निष्पक्ष जांच की मांग की जाएगी।

इधर, एएमयू प्रशासन की ओर से जनसंपर्क अधिकारी डा. राहत अबरार ने स्पष्ट किया है कि मीनू बोर्ड पर जिस ‘बीफ बिरयानी’ का जिक्र है। उसे समझने में भूल हुई है। ये ‘बीफ’ भैंस के गोश्त के बारे में है। इससे ज्यादा और कुछ नहीं।

अधिकारियों ने दी ये प्रतिक्रिया

beaf biryani matter in AMU

एएमयू के मेडिकल कॉलेज की एक कैंटीन में मीनू और रेट लिस्ट में बीफ बिरयानी का जिक्र किया गया था। इसकी फुटेज किसी इलेक्ट्रॉनिक चैनल कर्मी ने बनाई थी। जिस पर मेयर शकुंतला भारती से बयान लिया गया था। प्रकरण संज्ञान में आते ही चीफ प्रॉक्टर मोहसिन को इसकी खबर दी गई। उन्होंने तत्काल दो डिप्टी प्रॉक्टर मौके पर भेजे। जिन्होंने कैंटीन में जांच की। इस पूरे प्रकरण में ‘बीफ’ शब्द के पूरे मीनिंग को समझने में भूल हुई है। बीफ बिरयानी में भैंसे के गोश्त का इस्तेमाल होता है, जिसे इंग्लिश में बीफ बिरयानी नाम दिया गया है। इंग्लिश डिक्शनरी में भी बीफ शब्द की पूरी जानकारी है।  दरअसल, सन् 1875 में स्थापित मोहमडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना करने के बाद ही सर सैयद अहमद खां ने बहुसंख्यक हिंदू समुदाय की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए गाय के गोश्त के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था। 1884-85 में एक कर्मी ने बकरीद में गाय की कुर्बानी देने की तैयारी की तो उसे तुरंत नौकरी से निकाल दिया गया। उनके सख्त निर्देश थे कि कभी भी गाय या गौवंश का इस्तेमाल यहां नहीं होगा। उनके निर्देश का आज भी एएमयू में अक्षरश: पालन हो रहा है।

-डा. राहत अबरार, एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी


मुझे कुछ लोगों से एएमयू के मेडिकल कैंटीन में ‘बीफ बिरयानी’  उपलब्ध किए जाने की सूचना मिली थी। इसकी जानकारी जिला प्रशासन और पुलिस को देने का निर्णय लिया है। इस बारे में जिला प्रशासन और एसएसपी से शनिवार को मिलेंगी। अगर एएमयू की किसी कैंटीन में गौमांस या गौवंश का प्रयोग हो रहा है तो ये बेहद आपत्तिजनक है। ऐसा कुछ नहीं है तो बहुत अच्छा है। जिला प्रशासन और पुलिस अपने स्तर से एएमयू प्रशासन की मदद से वहां की कैंटीन में परोसे जा रहे ‘बीफ बिरयानी’ का सैंपल लेकर कर जांच कराएं। मुझे उम्मीद है कि एएमयू प्रशासन भी धार्मिक भावनाओं का ख्याल करते हुए जांच में सहयोग करेगा।

-शकुंतला भारती, मेयर अलीगढ़

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