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बर्फबारी देखने उत्तराखंड जा रहे हैं तो हो जाइए सावधान
हरीश लखेड़ा/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Mon, 16 Dec 2013 12:23 AM IST
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सर्दी के मौसम में उत्तराखंड की बर्फबारी देखने जा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली ज्यादातर सड़कें खस्ताहाल हैं।
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यात्रा के दौरान यदि नेशनल हाइवे पर उल्टी दिशा से भैंसा-गाड़ी आती दिखे तो यह भी समझ लें कि आप उत्तर प्रदेश में हैं। दिल्ली से उत्तराखंड जाते हुए खासतौर पर दिल्ली-देहरादून और दिल्ली-नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग पर यह नजारा आम है।
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गन्ने की पेराई के मौसम में बेलगाम दौड़ते ट्रक-ट्रालियों और भैंसा गाड़ियों से इन राजमार्गों पर दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है। राष्ट्रीय राजमार्ग व सड़क परिवहन मंत्रालय के आंकड़े गवाह हैं कि देश में प्रति मिनट एक दुर्घटना होती है।
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इन हादसों में मारे जाने वाले लोगों में 37.10 फीसदी राष्ट्रीय राजमार्गों पर जान गंवाते हैं। हर साल लगभग 15 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं और लगभग इतने ही घायल होते हैं। इसके बावजूद केंद्र व उत्तर प्रदेश की सरकारें सबक लेती नहीं दिख रही हैं।
दिल्ली और देहरादून के राष्ट्रीय राजमार्ग को बीओटी योजना के तहत मेरठ और मुजफ्फरनगर क्षेत्र में चार व छह लेन का बना दिया गया है। इससे गुजरने पर 75 रुपये का टैक्स देना पड़ता है।
इसके बावजूद इस सड़क से सही सलामत गुजर जाने की कोई गारंटी नहीं है। गन्ना व भूसे से लदे बेलगाम ट्रक व ट्रालियां यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाती देखी जा सकती हैं। चूंकि इस राष्ट्रीय राजमार्ग की सर्विस लेन नहीं हैं, इसलिए विपरीत दिशा से भी वाहन चले आते हैं।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय राजमार्ग के बीओटी से बने क्षेत्र को छोड़ दें तो उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली लगभग सभी सड़कें इस कदर खस्ताहाल हैं कि वे दुर्घटना को खुला न्योता दे रही हैं।
दिल्ली से देहरादून, कोटद्वार, रामनगर, रुद्रपुर, टनकपुर की सड़कें उत्तर प्रदेश से होकर गुजरती हैं। मुजफ्फरनगर क्षेत्र में रामपुर तिराहा से देहरादून तक की सड़क इस कदर टूटी है कि वाहन को 20-30 किमी प्रति घंटे की चाल से भी चला पाना संभव नहीं है।
नैनीताल जाने के लिए रामपुर व रुद्रपुर क्षेत्र में पिछले डेढ़ साल से लगभग 40 किमी सड़क लगभग गायब है। रामनगर व उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली सड़क का भी कमोबेश यही हाल है।
रामपुर से कालाढूंगी तक लगभग 10 किमी सड़क के दर्शन नहीं होते हैं। यह हाल उत्तरप्रदेश व उत्तराखंड दोनों राज्यों में है। राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय भी इन बदहाल सड़कों को नजरंदाज किए हुए है।