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उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार का कहर, बचकर रहें
गोरखपुर/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 06 Oct 2012 07:34 AM IST
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उत्तर प्रदेश में दिमागी बुखार का कहर बढ़ने लगा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दिमागी बुखार से शुक्रवार को एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। इंसेफेलाइटिस से पीड़ित 16 बच्चे भर्ती कराए गए हैं। वर्तमान समय में 226 बच्चों का इलाज किया जा रहा है। इससे पहले बुधवार को सात बच्चों की मौत हो गयी थी। इसके बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस साल दिमागी बुखार से मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 390 के पार पहुंच गई थी।
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अतिरिक्त स्वास्थ्य निदेशक दिवाकर प्रसाद ने कहा कि बुधवार को दिमागी बुखार से पीड़ित 23 व्यक्तियों को बीआरडी एमसीएच एवं अन्य सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। राज्य में इस साल विभिन्न अस्पतालों में मस्तिष्क ज्वर के कुल 2,511 मामले पाए गए हैं, जिनमें से 390 लोगों की मौत हो चुक है, जबकि अनेक अस्पतालों में अभी भी 270 व्यक्तियों का इलाज किया जा रहा है।
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क्या है दिमागी बुखार?
मेनिनजाइटिस या दिमागी बुखार बहुत ही खतरनाक संक्रामक रोग है, जो मेनिन्गोकोकस नामक जीवाणु से होता है। इसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में सूजन आ जाती है। इसे सामान्य भाषा में गर्दन तोड़ बुखार भी कहा जाता है। यह सामान्यत: बैक्टीरियल और वायरल प्रकार का होता है।
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दिमागी बुखार के लक्षण
-सिरदर्द
-तेज़ बुखार
-गर्दन में अकड़न
-प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
-मिचली आना
-सुस्ती या कमजोरी
-व्याकुलता
-उल्टियां आना
बचाव के उपाय
-भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें या वहां कम जाएं।
-यह संक्रामक रोग है, इसलिए अगर किसी व्यक्ति को पहले से ही बुखार है, तो उसके संपर्क में आने से बचें।
-अपने आसपास सफाई का खास ख्याल रखें।
-मेनिनजाइटिस से बचाव के लिए बाज़ार में ‘मेनवियो’ नामक टीका उपलब्ध है।