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425 करोड़ की हेराफेरी में फंसी BCCI-IPL

Tue, 17 Feb 2015 12:09 PM IST
Updated Tue, 17 Feb 2015 12:09 PM IST
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BCCI and IPL trapped in Misappropriation of 425 lakh

प्रवर्तन निदेशालय ने बीसीसीआई, आईपीएल, उनके अधिकारियों और निजी मल्टीमीडिया कंपनियों को वर्ष 2009 में मीडिया अधिकार बेचने में विदेशी मुद्रा कानून के उल्लंघन के आरोप में कारण बताओ नोटिस भेजा है। 425 करोड़ रुपये की हेराफेरी के इस मामले में यह नोटिस करीब 10 लोगों और कंपनियों को भेजा गया है।

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इनमें बोर्ड ऑफ कंट्रोल फॉर क्रिकेट इन इंडिया (बीसीसीआई) के पूर्व प्रमुख एन. श्रीनिवासन, आईपीएल के तत्कालीन चेयरमैन ललित मोदी, मुख्य संचालन अधिकारी (सीओओ) सुंदर रमण और वर्ल्ड स्पोर्ट्स ग्रुप (डब्ल्यूएसजी) व मल्टी स्क्रीन मीडिया (एमएसएम) के अधिकारियों को भेजा गया है।
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इन सभी पर संविदा में गलत तरीके से बदलाव कर अवैध भुगतान करने का आरोप है। ईडी की ओर से नोटिस का यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब आईपीएल के अगले सत्र के लिए सोमवार को बंगलूरू में खिलाड़ियों की नीलामी चल रही थी। वर्ष 2008 में इस सौदे को अंजाम दिया गया था।
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सुविधा शुल्क का भुगतान अवैध तरीके से करने का आरोप

BCCI and IPL trapped in Misappropriation of 425 lakh

सौदे के तहत बीसीसीआई ने 91.8 करोड़ डॉलर में 10 साल के लिए मीडिया राइट डब्ल्यूएसजी को बेच दिया था। उसी साल डब्ल्यूएसजी ने मल्टी स्क्रीन मीडिया के साथ एक सौदा कर लिया जिसके तहत सोनी टीवी को इसका आधिकारिक प्रसारणकर्ता बना दिया गया।

एक साल बाद यह सौदा नौ साल के लिए किया गया, जिसके लिए मल्टी स्क्रीन ने 1.63 अरब डॉलर का भुगतान किया। इसके बाद एमएसएम सिंगापुर की ओर से डब्ल्यूएसजी मॉरीशस को 425 करोड़ रुपये के सुविधा शुल्क का भुगतान अवैध तरीके से करने का आरोप लगा।

ईडी ने वर्ष 2009 में फेमा के तहत इसकी जांच शुरू की। ईडी ने जांच में पाया कि यह भुगतान अवैध लाभार्थी को मिला जबकि इसका फायदा क्रिकेट नियामक को मिलना चाहिए था।

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