आतंक के बीच मतदान को तैयार बस्तर
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लाल आतंक के बीच बस्तर अब लोकसभा के महासंग्राम के लिए बृहस्पतिवार को मतदान के लिए तैयार है।
नक्सलियों ने चुनाव के बहिष्कार का ऐलान करते हुए सरकारी कर्मचारियों को चुनाव प्रक्रिया तथा मतदाताओं को मतदान में भाग नहीं लेने की चेतावनी दी है।
चिंतागुफा स्थित सीआरपीएफ कैंप पर हमला कर नक्सली अपने खतरनाक इरादे जाहिर की भी कर चुके हैं। इससे बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों में सन्नाटा पसरा है, अलबत्ता शहरों में तो सब कुछ सामान्य दिख रहा है।
नक्सल प्रभावित बस्तर में 12.98 लाख मतदाता
छत्तीसगढ़ में बस्तर अकेली सीट है, जहां 10 अप्रैल को मतदान होना है।
भाजपा के दिनेश कश्यप, कांग्रेस के दीपक कर्मा और आम आदमी पार्टी की सोनी सोरी समेत आठ प्रत्याशियों में से किसी एक को संसद पहुंचाने का फैसला नक्सल प्रभावित बस्तर के 12.98 लाख मतदाता करेंगे।
खास बात यह है कि बस्तर भी देश के उन गिने-चुने संसदीय क्षेत्रों में शामिल है, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से ज्यादा है।
नक्सलियों ने जारी की चेतावनी भरी सीडी
नक्सली लगातार पोस्टर फेंक कर लोगों को चुनाव से दूर रहने की चेतावनी दे रहे हैं। चर्चा है कि नक्सलियों ने चेतावनी भरी सीडी भी जारी की है।
विधानसभा चुनाव में नक्सलियों ने खूनी खेल खेल कर झीरम घाटी में प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म ही कर दिया था।
इस बार भी आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा के नक्सलियों के यहां एकत्रित होने की खुफिया सूचना है। इससे प्रशासन बेहद सतर्क है।
सिर्फ 143 कंपनी सुरक्षा बलों के हवाले बस्तर
हालांकि प्रशासन की शिकायत है कि पिछले चुनाव में भेजी केंद्रीय सुरक्षा बलों की 650 कंपनियों की बजाए इस बार मात्र 143 कंपनियां ही मिली हैं। मतदान दलों को दूर दराज के 28 मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए छह हेलीकॉप्टर लगाए गये हैं, जबकि हिंसा के हालात से निपटने के लिए एयर एंबुलेंस भी तैयार रहेगी।
नक्सलियों की ओर से धमकी जारी करने में दंडकारण्य जोन के नए नक्सली कमांडर रमैया राजन का नाम सामने आया है। खास बात यह है कि बस्तर के शहरी क्षेत्रों में तो रात में भी जमकर प्रचार हो रहा है।
दूसरी तरफ गांव इस चहल पहल से दूर हैं। बस्तर में दर्जनों ऐसे गांव हैं जहां लोगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचने के लिए 55 से 95 किलो मीटर पैदल चलना होगा।
मतदान केंद्र तक पहुंचने में लग जाते हैं तीन दिन
दिल्ली में भाजपा ने अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करते हुए वादा किया कि सभी गांवों को इंटरनेट से जोड़ा जाएगा, लेकिन पिछले एक दशक से उसी के शासित छत्तीसगढ़ के बस्तर में दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को मतदान करने के लिए 95 किमी तक पैदल चलना पड़ेगा।
उन्हें इंटरनेट से ज्यादा सड़क की जरूरत है। मतदान केंद्र तक पहुंचने के लिए उन्हें इस दौरान रात में रास्ते में पड़ने वाले अपने रिश्तेदारों के घरों में रहना होगा।
भाजपा शासित छत्तीसगढ़ के बस्तर संसदीय क्षेत्र के बीजापुर विधानसभा क्षेत्र में 11 ऐसे ही मतदान केंद्र हैं। मतदान केंद्र से सेंड्रा गांव 95 किमी, चरेपल्ली व दूरपागुड़ा 55 किमी, बड़े काकलेकर, दूरपापड़ व पेदापल्ली 50 किमी तथा पिलूर 40 किमी और कादलपर्ती 30 किमी दूर हैं।
दंडकारण्य में चलता है अब रमैया का कानून
छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र को नक्सलियों का मजबूत गढ़ माना जाता है। दक्षिण बस्तर के इस क्षेत्र में अब नक्सलियों के नये कमांडर के तौर पर रमैया राजन का नाम सामने आया है।
इससे पहले तक प्रभाकर रमन्ना, रमैया, गुडसा व राजे का नाम सुना जाता रहा है। पुलिस को सूचना मिली है कि चुनाव बहिष्कार की धमकी पर अमल कराने के लिए आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा के नक्सली यहां बस्तर में एकत्रित होने लगे हैं।